Tuesday, September 20, 2011

सच्चा कौन ? महबूबा या सुषमा

 

मोदी  का  सदभावना उपवास अभी खत्म  नहीं हुआ था की भाजपा  की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज के दिए गए बयान ने एक नया बखेड़ा खड़ा कर दिया दरअसल  मोदी के सदभावना उपवास के आखिरी दिन भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा था कि एकता परिषद की बैठक में महबूबा ने उन्हें बताया था कि उनके एक दोस्त ने
उनसे कहा था कि वह गुजरात में उद्योग लगाना चाहते थे। मुख्यमंत्री मोदी ने आधे घंटे में ही सारी बातें फाइनल कर दी  थीं। जो आज गुजरात में उद्योग  बन रहा  है | फिर क्या था सुषमा स्वराज के इस  बयान पर कांग्रेश पार्टी में हड़कम मच गई | इस बात का पता जब महबूबा मुक्ति को चला तो सुषमा स्वराज की  बात को खारिज करते हुए पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा  कि उन्होंने राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक में मोदी की प्रशंसा नहीं की थी। उधर, सुषमा स्वराज भी अपने बयान पर अड़ी हुई   हैं। सुषमा का कहना है कि मैंने वही कहा जो महबूबा ने राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक में कहा था।
               महबूबा ने इसपर सफाई देते हुए कहा कि मैंने कभी भी मोदी की प्रशंसा नहीं की थी। महबूबा ने  केंद्र सरकार से अपिल  की है कि बैठक के दौरान उनके भाषण का पूरा टेक्स्ट जारी किया जाए ताकि सच सामने आ सके। उधर इस मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मौका ताड़ते हुए    महबूबा  के ऊपर  लगे मामले के खिलाफ  ट्वीट किया है | जवाब में महबूबा ने कहा है कि  उमर दिन भर में हजार ट्वीट करते हैं और कहते हैं कि निजी जिंदगी में आई उलझनों के बावजूद वह बतौर मुख्यमंत्री कड़ी मेहनत कर रहे हैं।महबूबा मुक्ति ने  उमर अब्दुल्ला पर निशाना साधते हुए कहा कि  एनआईसी की उस बैठक में वह भी मौजूद थे लेकिन वह 15 दिनों बाद क्यों ट्वीट कर रहे हैं।ऐसे  में  जम्मू- कश्मीर की राजनीति गरमा गई है। ऐसे में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तो शुरू होगया है लेकिन देखना ये है कि सच्चाई आखिर किसकी बात में है | सुषमा स्वराज की बातो में या महबूबा मुक्ति की बातो में |

मानेन्द्र कुमार भारद्वाज

No comments:

Post a Comment