Monday, January 9, 2012

भाजपा और कुशवाहा


राजनीति में कब क्या हो जाये कुछ कहा नही जा सकता है | कभी कांग्रेस और दूसरी पार्टियों के ऊपर भ्रष्टाचार और भ्रष्ट नेताओं का आरोप लगाने वाली भाजपा ने यह कभी नहीं सोचा होगा की उसे अपने एक फैसले के कारण इतना ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ेगा की उसके किये कराये सारी मेहनत पर पानी फिर जायेगा | भ्रष्टाचार के खिलाफ दम भरने वाली भाजपा ने बसपा से निष्कासित यूपी के पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा को पार्टी में अन्दर क्या लिया की भाजपा के सारे दाव ही उल्टे पड़ गए |

दरअसल बाबू सिंह कुशवाहा, बादशाह सिंह जैसे बसपा से निष्किसित नेताओं को भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने पार्टी में यह सोच कर शामिल किया था कि उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग में पार्टी की पैठ बनाने के लिए बाबू सिंह कुशवाहा का पार्टी में होना उनके पार्टी के लिए काफी फायदे मंद होगा क्यों की कुशवाहा पिछड़े वर्ग से आते हैं | वही पार्टी के कुछ नेताओं ने नितिन गडकरी के इस फैसले का विरोध भी किया | जहाँ बाबू सिंह कुशवाहा के पार्टी में शामिल होने से मेनका गांधी और आदित्यनाथ आहत हुए तो वही बादशाह सिंह को लेकर उमा भारती गुस्सा हुई | पार्टी के अन्दर जहाँ इस बात को लेकर मतभेद है , वही बाहरी तरफ से भाजपा के नेता इस बात को लेकर बचाव करते हुए दिखते है कि उनकी पार्टी ने सही फैसला लिया है | लेकिन सचाई तो यह है कि लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली कुशवाहा को भाजपा में शामिल करने पर पहले से ही नाखुश थे। 

बात कुछ भी हो लेकिन ये तो तय है कि गडकरी के इस फैसले ने विपक्ष को वार करने का एक मौका दे दिया है | ऐसे में कांग्रेस भला कैसे पीछे रहती | राहुल ने कहा कि बाबू सिंह कुशवाहा ने बीजेपी को खरीद लिया है। उन्होंने कहा की कुशवाहा बीएसपी से निकाले जाने के बाद सबसे पहले हमारे पास आए थे। कुशवाहा ने हमसे (कांग्रेस) कहा कि मुझे बचा लीजिए। कांग्रेस ने कुशवाहा का साथ देने से साफ इंकार कर दिया। कांग्रेस किसी भी भ्रष्टाचारी का साथ नहीं देगी। जो भी भ्रष्‍टाचार में लिप्‍त पाया जाएगा, चाहे वो कांग्रेस का हो या अन्य किसी पार्टी का। उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

वही जनक्रांति पार्टी राष्ट्रवादी के संरक्षक कल्याण सिंह का कहना है कि कुशवाहा को पार्टी में शामिल करने के लिए भाजपा ने कोई बड़ी डील की है | जाँच सीबीआई से कराई जानी चाहिए , ताकि असलियत सामने आ सके |

अपने खिलाफ उठते सवालो को देख कर कुशवाहा एक बार फिर काफी मुश्किल में पड़ते जा रहे थे | ऐसे में अब बाबू सिंह कुशवाहा ने भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को चिट्ठी लिखकर अपनी सदस्यता ‌स्‍थगित करने की मांग की है। कुशवाहा ने चिट्ठी में लिखा है कि मेरी सदस्यता फिलहाल स्‍थगित रखी जाए। साथ ही उन्होंने चिट्ठी में भाजपा को वोट देने की अपील भी की है। कुशवाहा ने बसपा, सपा और कांग्रेस पर पिछड़े वर्ग की अनदेखी का आरोप लगाया है।

ऐसे में कुशवाहा भाजपा के लिए गले में फंसी उस हड्डी की तरह है जिसे न अन्दर लिया जा सकता है और न ही बहार ही निकला जा सकता है | अपने इस परेशानी का जिम्मेदार खुद भाजपा ही है जिसने कुशवाहा को लेकर अपने पैर पर कुल्हाड़ी खुद मारी है |


मानेन्द्र कुमार भारद्वाज

Tuesday, January 3, 2012

परिवारवाद के सहारे सपा



परिवारवाद की संस्कृति भारतीय राजनीति की जड़ो में रच बस गई है | इसकी तरक्की का ग्राफ इतनी तेजी से बढ़ा है की बड़े - बड़े लोग हैरत में पड़ जाये | देश दुनिया में हर जगह ऐसा ही नजारा है और यूपी भी इससे अछुता नहीं है | यहाँ आर्थिक और सामाजिक विकास का संकट भले  ही हो लेकिन परिवारवाद की राजनीति खासा प्रगति पर है | उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र जितना फल - फुला है उससे कही ज्यादा परिवारवाद हावी रहा है | राजनीतिक  विरासत संभालने और उसी आधार पर सियासत में मुकाम हासिल करने की कवायद वर्षो से जारी है |

पांच राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनाव में उत्तर प्रदेश काफी अहम् माना जा रहा है | यहाँ पर मिली जीत - हार का प्रभाव केंद्र तक पड़ता है | जिसके लिए राजनीतिक दलों ने चुनाव में अपने - अपने बाहुबलियों को उतर रखा है | बसपा प्रमुख अपनी सत्ता का भरपूर उपयोग कर रहा है | अगर गौर किया जाये तो बसपा के बाद सपा सत्ता की सबसे बड़ी दावेदारी पेश कर सकती है | पार्टी कार्यकर्ताओ का मानना है कि 74 वर्षीय मुलायम सिंह यादव का यह आखिरी चुनाव हो | ऐसे में सवाल उठता है कि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा ? ऐसे में और पार्टियों के नेताओं की तरह मुलायम सिंह भी यही चाहेंगे कि सत्ता की बागडोर परिवार में ही रहे | ऐसे में सपा के युवराज कहे जाने वाले अखिलेश यादव हो सकते है | अटकले तो ये भी लगाये जा रहे है कि प्रतीक भी इसके लिए दावेदार हो सकते है लेकिन प्रतीक तो अभी राजनीति से कोसों दूर है | वैसे राजनीति की गणित के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है कि कब क्या हो जाये |

उधर अखिलेश सिंह यादव पूरी ताकत के साथ सपा की खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस लेन में लगे है लेकिन अगर देखा जाये तो उनमें नेता वाले गुण अभी आना बाकी है | ऐसे में दूसरी पत्नी साधना गुप्ता पर दबाव भी बढता जा रह है | माना जा रहा है कि प्रतीक को मुलायम सिंह यादव अगर इस विधान सभा चुनाव में नहीं उतारेंगे  तो आगामी 2014 के लोकसभा चुनाव में साईकिल की सवारी जरुर करायेंगे | देखने वाली दिलचस्प बात यह है कि बदायूं की संसदीय सीट भी सपा के खाते में है | यहाँ पर उनके भतीजे धर्मेन्द्र विराजमान है लेकिन अपने छोटे बेटे प्रतीक को चुनावी मंच पर उतारने की जरुर सोच रहे है | यही नहीं मुलायम सिंह यादव ने अपनी बड़ी बहूँ डिम्पल को फिरोजाबाद संसदीय क्षेत्र में उतारा था वो बालीवुड अभिनेता राजबब्बर से हार गई थी |

अगर इतिहास पर गौर करे तो वंशवाद और परिवारवाद की परम्परा को कांग्रेस ने न केवल गति बढाया बल्कि यह जनमानस को बरसो बरस तक यह समझाने में भी कामयाब रही है कि देश को केवल नेहरू गाँधी का परिवार ही आगे ले जा सकता है | इसी का परिणाम है कि आज सपा भी परिवार को बढावा दे रहा है |


इंडिया हल्ला बोल
अम्बरीश संग मानेन्द्र

Friday, December 16, 2011

पार्टियों का लोकपाल समर्थन एक दिखावा ?



जिस लोकपाल बिल को अन्ना हजारे शीतकालीन सत्र में आने और पारित हाने की उम्मीद लगाये बैठे थे वह उम्मीद अब अन्ना हजारे की टूटती हुई नजर आ रही हैं | जिसके लिए अन्ना हजारे एक बार फिर अनशन पर जाने की बात कहकर यह कोशिश कर रहे है कि सरकार शीतकालीन सत्र के बचे हुए दिनों में बिल को पेश कर पारित करवाएं | जो नामुमकीन सा दिख रहा है | दरसल संसद का शीतकालीन सत्र 22 दिसंबर को ख़त्म हो रहा है | जिससे बिल का पारित होना आसान  नहीं दिख रहा है | अन्ना का कहना है कि अगर लोकपाल बिल पारित होने में ज्यादा समय लगता है तो संसंद को शीतकालीन सत्र को बढाना चाहिए |

अभी पिछले दिनों अन्ना हजारे ने लोकपाल विधेयक को राजनीतिक ताकत दिलाने के लिए जंतर - मंतर पर राजनेताओं के साथ एक दिन का महाबहस किया | जिसमे कई पार्टियों के नेताओं ने पहुँच कर अपना समर्थन लोकपाल बिल के पक्ष में जताया | अन्ना हजारे ने लोकपाल बिल पास होने में होने वाली देरी के लिए केंद्र सरकार को दोषी ठहराया | जिसके बाद अन्ना हजारे की टीम की कोर कमेटी ने आगे की रणनीति के लिए बैठक किया | जिसमे अन्ना हजारे ने सरकार को यह बताने कि कोशिश की कि अगर 20 दिसंबर को संसद में लोकपाल बिल पर बहस नहीं हुई तो वह 27 दिसंबर को मुंबई में फिर से अनशन शुरू करेंगे |

जिसके लिए केंद्र सरकार ने सभी पार्टियों के नेताओ के साथ लोकपाल के मुद्दे पर बात करने के लिए सर्वदलीय बैठक किया | जिसका नतीजा तो यही दर्शाता है कि अभी निकट भविष्य में आम पार्टियों में सहमती नहीं है | जो नेताओं की तरफ इस बात का इशारा करता है कि हाथी के दांत खाने को कुछ और दिखने को कुछ और है | जो लोकपाल का समर्थन तो करती है लेकिन जब बात आम सहमती की आती है तो वह सहमत ही नहीं होते हैं | ऐसे में कांग्रेस की हालत कुछ ठीक नहीं दिख रही है | क्यों कि कांग्रेस को पता है विरोधी पार्टिया ये नहीं चाहेंगी की लोकपाल पारित हो क्यों कि अगर लोकपाल बिल पारित नहीं होगा तो उन्हें होने वाले चुनाव के लिए एक ऐसा मुद्दा मिल जायेगा जिससे जनमत हासिल करने का एक आसान सा कार्य होगा | जिसके लिए पार्टियों ने तो अन्ना के साथ होने की बात तो कर रहे है, साथ में ये भी कोशिश कर रहे है कि लोकपाल अभी फ़िलहाल शीतकालीन सत्र में पास न हो | शायद यही वजह है कि अब तक कई राज्यों के मुख्य मंत्री ने अन्ना के साथ होने की बात कह कर आगामी चुनाव में भ्रष्टाचार और अन्ना के साथ होने की बात उठाकर अपना उल्लू सीधा करेंगे | जिसका एक कारण ये भी हो सकत है कि ये पार्टियों लोकपाल बिल में प्रधान मंत्री , सीबीआई , ग्रुप 'सी' और 'डी' के कर्मचारियों के मामले को उठाकर टालने की कोशिश कर रही हो |

प्रधान मंत्री के मुद्दे को लेकर कुछ पार्टियों का मानना है कि प्रधान मंत्री को लोकपाल के दायरे में नहीं आना चाहिए तो वही ज्यादा पार्टियों का मानना है कि कुछ प्रावधानों और सावधानियों के साथ प्रधान मंत्री को लोकपाल के दायरे में आना चाहिए | कुछ लोग इस बात को लेकर असहमत है कि सीबीआई को लोकपाल को दायरे में नहीं आना चाहिए | वही कुछ पार्टियों का कहना है कि सी बी आई को सरकारी नियंत्रण के मुक्त होना चाहिए लोगों को इस बात के लेकर मतभेद है कि अगर ऐसा हुआ तो सीबीआई का लोकपाल से कैसा संबंद होगा | पार्टियों के बीच मतभेद का एक और मुद्दा है | वह है ग्रुप 'सी' और 'डी' के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने का | क्यों की टीम अन्ना का कहना है कि भ्रष्टाचार का सामना अधिकांस लोगों को ग्रुप 'सी' और 'डी' के कर्मचारियों से करना पड़ता है | इस लिए इसे लोकपाल के दायरे में लाना चाहिए | वही सरकार इन ग्रुप 'सी' और 'डी' के कर्मचारियों के लिए अलग कानून बनाने के पक्ष में है |

अन्ना हजारे और उनके सहयोगियों के साथ इस समय जनता का समर्थन भले ही हो लेकिन सच्चाई ये भी है कि संसद में जनता के द्वारा भेजे गए सांसदों के द्वारा ही लोकपाल बिल को पारित किया जायेगा | ऐसे में सांसदों का यह दाइत्व बनता है कि सांसद जनता के भरोसे को कायम रखते हुए एक प्रभावी लोकपाल बिल संसद में पेश करे जिससे जनता का भला हो सके |




मानेन्द्र कुमार भारद्वाज

Wednesday, December 14, 2011

अधर में लटका ड्रीम प्रोजेक्ट



 सोनिया गाँधी का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जाने वाला खाद्य सुरक्षा बिल की मांग अभी फ़िलहाल अधर में लटकता हुआ दिख रहा है | जिसको महीनों की बातचीत के बाद राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (रासप) ने एक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा बिल की सिफारिश की थी | जिसमे देश के गरीब और असहाय लोगों को सरकार की तरफ से खाद्य मुहैया करने को कहा गया है | जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का प्रस्ताव है कि भारत की आबादी के कम से कम तीन चौथाई हिस्से के लिए, जिसमें 90 प्रतिशत ग्रामीण और 50 प्रतिशत शहरी आबादी आती है, सरकारी अनुदान पर अनाज उपलब्ध कराने के लिए कानून बनाया जाए। इसके अन्तर्गत 75 प्रतिशत को पूर्वाधिकार परिवार और सामान्य परिवारों में बांटा जाना है।

जिसके अंतर्गत आने वाले परिवार को हर महीने एक रुपये प्रति किलोग्राम की दर से 35 किलो अनाज-(ज्वार, बाजरा आदि) दो रुपये की दर से गेंहू और तीन रुपये की दर से चावल पाने के अधिकारी होंगे जबकि आम परिवारों को 20 किलो पाने का अधिकार होगा, जिसका मूल्य हालिया न्यूनतम समर्थन मूल्य के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा, जो आजकल साढ़े पांच-छह रुपये प्रति किलोग्राम पड़ता है। इस ड्रीम प्रोजेक्ट के अंतर्गत 14 साल के लड़के और लडकियों तथा गर्भवती महिलाओं के लिए नगद सहायता का प्रावधान है |

सोनिया गाँधी का ड्रीम प्रोजेक्ट इतना बड़ा है कि देश का एक बड़ा भाग इसके अंतर्गत आ जाता है | जिसके लिए उतनी ही ज्यादा अनाज की आवश्यकता भी होगी | जो करीब 20 से 25 मिलियन टन अतिरिक्त अनाज की जरूरत होगी। देश की जनता के लिए यह बात बहुत अच्छी है लेकिन इस प्रोजेक्ट को आन्न - फन्ना में बनाने के कारण इसमें बहुत सी कमियां है | कुछ लोगों का ये भी कहना है कि सोनिया ये प्रोजेक्ट को लाकर पार्टी की छवि को सुधारने का प्रयास है | जो कि एक चुनावी हथकंडा है |

कई लोगों ने खाद्य सुरक्षा बिल की कमियों को लेकर विरोध है | इस मामले में कृषि, खाद्य व उपभोक्ता मामलों के मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने पहले ही अपने बयान में यह कह दिया था कि अगर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के चहेते खाद्य सुरक्षा विधेयक को कानून बना दिया गया तो देश राजकोषीय घाटे के दलदल में घंस जाएगा।

उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत अगर गरीब परिवारों को महीने में 25 किलो अनाज दिया जाता है तो सरकार को 76720 करोड़ रुपए की खाद्य सब्सिडी देनी पड़ेगी। अगर 35 किलो अनाज दिया जाता है तो खाद्य सब्सिडी का बोझ 1.07 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा। उदाहरण के तौर पर विधेयक के मुताबिक गरीब परिवारों को दो रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से गेहूं दिया जाना है, इससे सरकार के ऊपर प्रति किलो 17 रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। इससे राजकोषीय घाटे को संभालने का सारा गणित चौपट हो सकता है। चालू वित्त वर्ष 2010-11 में खाद्य सब्सिडी के लिए 55,578 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

पवार ने कहा कि अगर खाद्य सुरक्षा कानून के चलते ज्यादा सब्सिडी देनी पड़ी तो हम 2012-13 तक राजकोषीय घाटे को जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के 4.1 फीसदी तक लाने का लक्ष्य नहीं हासिल कर पाएंगे।

लेकिन इस कानून का समर्थन करनेवालों का कहना है कि इससे देश के 40 करोड़ गरीबों को भुखमरी से बचाया जा सकता है। साथ ही यह कि सरकारी खरीद का लाखों टन अनाज अभी बरबाद होता रहता है, जिसका आगे सदुपयोग किया जा सकता है।

जाहिर है योजन का स्वरुप काफी बड़ा है | ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि जब देश में महंगाई और आर्थिक मंदी जैसे संकट है तो इस योजना के लिए इतना पैसा (1 लाख 10 हज़ार करोड़ रुपए की जरूरत होगी) कहा से आयेगा | एनएसी के अनुमान के मुताबिक सरकार को इस योजना के लिए करीब 28 हजार करोड़ की अतिरिक्त सब्सिडी देनी होगी। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि मौजूदा राशन की दुकानों से इसे कैसे लागू किया जाएगा।

जहाँ देश में करीब 40 प्रतिशत लोग 20 रुपये में गुजर- बसर करने के किये मजबूर है तथा जहाँ अभी गरीबी की परिभाषा भी सुनिश्चित नहीं है | वहां पर यह कैसे निर्धारति किया जायेगा कि कौन गरीब है | राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (रासप) की माने तो गरीबो को पूर्वाधिकार परिवार और सामान्य परिवारों में बांटा जाना है। जिसका विभाजन जाति जनगण के आधार पर किया जाना है | जब की जाति जनगण के लिए कोई समय सीमा ही नहीं तय किया गया है | ऐसे में जरुरत मंद कौन है इसका पहचान कैसे किया जा सकता है | ऐसे में जरुरत मंद को अनाज नहीं मिला तो वह कहा पर जाकर शिकायत करेगा यह भी निश्चित नहीं है |

खाद्य सुरक्षा बिल बिल देश के लिए बहुत जरुरी है लेकिन उससे भी ज्यादा जरुरी यह है कि अन्य योजनो की तरह यह योजन भी लोगों के भ्रष्टाचार का शिकार न बन जाये इसके लिए जरुरी है कि कोई भी योजना लागू करने के पहले उसके अच्छाइयों और बुराइयों पर पहले गहन मंथन हो | जिसके बाद एक प्रभावी योजना पारित हो जिससे देश की जनता लाभान्वित हो सके |




मानेन्द्र कुमार भारद्वाज

Tuesday, December 13, 2011

मायावती के दौरे में पैसों की बर्बादी हो रही है - राहुल गांधी

                        

लखनऊ- कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी एक बार फिर यूपी में अपना चुनावी दौरा तेज कर दिया है | दिल्ली से सीधे यूपी के नवगठित जिलों भीमनगर और बदायूं से अपने दौरे की शुरुआत करते हुए राहुल ने लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जब तक आप जागोगे नहीं, उठोगे नहीं और लड़ोगे नहीं, तब तक पिछड़ते ही रहोगे। हम यहां आएंगे, दुर्दशा देखेंगे, गुस्सा-दुखी होंगे, लेकिन हमारे हाथ भी बंधे होंगे।

राहुल गाँधी बसपा सरकार को अपना निशाना बनाते हुए कहा कि यूपी में मनरेगा के अरबों रुपये इधर से उधर करने के साथ ही एनआरएचएम में तीन हजार करोड़ रुपये खा लिए गए, जिन्हें आपके के लिए ही केंद्र ने भेजे थे। इसे तरह के घोटाले आप ही रोक सकते हैं। इसलिए स्वयं को मजबूत कीजिए।

राहुल गाँधी ने लोगों से कहा कि वे अपने मतों का प्रयोग सोच समझ कर करे | सरकार उसी की बनाओ जो आपके हितो का पूरी तरह से ख्याल रखे | लोग जाति- धर्म के नाम पर लोगों को लूट रहे है |

कुछ दिनों पहले राहुल गाँधी ने मायावती के दिए गए बयान कि राहुल गरीबो के बीच जाने का ढोंग और नौटंकी कर रहे है , का जवाब देते हुए राहुल ने कहा कि मैं गांवों-गरीबों के बीच इसलिए जाता हूं कि उन लोगों का दर्द नजदीक से जान सकूं और उनकी तरक्की के लिए कुछ कर सकूं। बीएसपी पर कटाक्ष करते हुए वे बोले कि मायावती के दौरे में पैसों की बर्बादी हो रही है, क्योंकि हेलिकॉप्टर में बैठे-बैठे गरीबों के दर्द को नहीं समझा जा सकता।

राहुल गाँधी ने अपने दौरे के दौरान दिए गए भाषण में कहा था कि अगर यूपी में उनकी सरकार बनी तो वह पाँच सालो में यूपी की सूरत बदल देंगे , पर दूबारा जोर देते हुए कह कि मैं लिखकर देने को तैयार हूं कि अगर आपने हमारा साथ दिया तो हम अगले दस सालों में यूपी का भविष्य बदल देंगे।



मानेन्द्र कुमार भारद्वाज

Monday, December 12, 2011

क्या अन्ना लाट साहब हैं ? उन्हें यूपी आने दीजिए, देख लेंगे - बेनी प्रसाद वर्मा



समाज सेवी अन्ना हजारे के जंतर - मंतर पर हुए एक दिन के उनशन के दौरान राहुल गाँधी पर हजारे के किये गए बयान से तिलमिलाई कांग्रेस सरकार ने अन्ना हजारे पर हल्ला सा बोल दिया है | आंध्र प्रदेश से कांग्रेस सांसद हनुमंत राव ने टीम अन्ना पर पलटवार करते हुए कहा है कि वे कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी पर हमले से बाज आए। वही इस्पात मंत्री ने कहा, ' क्या अन्ना लाट साहब हैं ? उन्हें यूपी (चुनाव में) आने दीजिए, देख लेंगे। वह 75 के हैं, तो कांग्रेस 125 साल पुरानी है। ' उन्होंने कहा, ' विपक्ष राहुल से डरा हुआ है और अन्ना उसके प्रवक्ता बन गए हैं, खासतौर से संघ के। '

रविवार को जंतर - मंतर पर एक दिन के अनशन के दौरान लोकपाल बहस में अन्ना ने राहुल के ऊपर निशाना साधते हुए कहा था कि लोकपाल में जनता की मांगे शामिल नहीं की गई , जबकि इसके किये पूरी संसद ने रजामंदी दी थी | ऐसे में सवाल है कि , जो सरकार पर दबाव बना सकता है | अगर वह (राहुल) पीएम बनाने का सपना देख रहे हैं तो उन्हें बहुत कुछ करना होगा | एक दिन झोपड़ी में रहना ही काफी नहीं है | जिसके बाद सोमवार को कांग्रेस के नेताओ ने समाजसेवी अन्ना हजारे पर चौतरफा हमला तेज कर दिया ।

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने अन्ना हजारे पर हमला बोलते हुए कहा कि , ' टीम अन्ना, बाबा रामदेव और श्री श्री रविशंकर सभी के इरादे राजनीतिक हैं। भ्रष्टाचार कोई मुद्दा ही नहीं है। वे कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाना चाहते हैं। राहुल गांधी ने लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने की बात कही, तो सबने मजाक बनाया, लेकिन अब टीम अन्ना भी इससे सहमत है। '




मानेन्द्र कुमार भारद्वाज



Thursday, December 8, 2011

सहवाग के दोहरे शतक से भारत चौथा वनडे जीता

इंदौर के होल्कर क्रिकेट स्टेडियम में वेस्टइंडीज और भारत के बीच खेले गए पांच वनडे मैचो के चौथे मैच में भारत के सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के तूफानी बल्लेबाजी के बदौलत भारत ने वेस्टइंडीज को 153 रनों से पराजीत कर दिया | वनडे मैच में 219 रनों का विश्व रिकार्ड बनाने वाले वीरेंद्र सहवाग को मैन ऑफ द मैच चुना गया | इस जीत के साथ भारत ने पांच वनडे मैच की सीरीज में 3-1 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है |

भारत द्वारा दिए गए निर्धारित 50 ओवर में 419 का विशाल स्कोर का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुवात कुछ खास नहीं रही और वेस्टइंडीज का पहला विकेट 1.6 ओवर में महज 13 रन पर किरन पॉवेल के रूप में गिरा | जिन्होंने केवल टीम के लिए 7 रन बनाये और रन आउट हो गए | वही वेस्टइंडीज का दूसरा विकेट सिमांस के रूप में गिरा | सिमांस 36 रन बनाकर जडेजा की गेंद पर पार्थिव के हाथों कैच हो गए | तो वही अपना पहला मैच खेल रहे राहुल शर्मा ने अपने पहले ही ओवर में सैमुअल्स को 33 के स्कोर पर पवेलियन भेज दिया। सैमुअल्स का विकेट 11.6 ओवर में 81 रन पर गिरा | जिसके बाद वेस्टइंडीज के चौथा विकेट डंजा हयात (11) के रूप में राहुल शर्मा ने लिया | जब कि वेस्टइंडीज का पांचवा विकेट 15.6 ओवर में किरन पोलार्ड को 3 रन के स्कोर पर राहुल शर्मा ने बोल्ड किया। तो वही पटेल ने विकेट के पीछे से अपना कमाल दिखाते हुए 23.2 ओवर में एंड्रे रसेल को 29 रन पर रैना की गेंद पर स्टंप आउट कर वेस्टइंडीज को छठा झटका दिया | इस विकेट के बाद वेस्टइंडीज का स्कोर 6 विकेट पर 140 रन था | इसके बाद वेस्टइंडीज की टीम कुछ खास न कर सकी और उसकी पूरी टीम 49.2 ओवर में 265 रनों पर सिमट गई | वेस्टइंडीज की तरफ से रामदीन ने सबसे ज्यादा 96 रन बनाये वही सैमी ने 2 रन , रवि रामपॉल ने 10 रन , , कीमर रोच ने 7 रन, नारिने ने नाबाद 27 रन बनाये |
भारत की तरफ से अपना पहला वनडे खेल रहे राहुल शर्मा और जडेजा को 3-3 विकेट मिले। इसके अलावा रैना को 2 विकेट मिले जबकि अश्विन ने 1 विकेट मिला।

भारत ने बनाये 419 रन

सीरीज में लगातार तीन बार टाँस जीतने वाले भारतीय कप्तान वीरेन्द्र सहवाग ने जैसे ही चौथे मैच में वेस्टइंडीज के कप्तान सैमी से टाँस जीता मैदान पर उपस्तिथ सभी दर्शक हँसाने लगे | वीरेन्द्र सहवाग ने पिछली हार को ध्यान में रखते हुए इस बार पहले बल्लेबाजी का फैसला किया | भारतीय पारी का शुरुवात करने आये सलामी बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग और गौतम गंभीर ने भारत को एक मजबूत शुरुवात दी | भारत का पहला विकेट 176  रन पर गंभीर के रूप में गिरा | गंभीर 67 रन बनाकर रन आउट हुए | सहवाग ने दूसरे विकेट के रूप में आये सुरेश रैना के साथ अपना धुंवा - धार पारी खेलना जारी रखा | रैना ने भी सहवाग का भर पुर साथ दिया लेकिन 40.2 ओवर में रैना 55 रन बनाकर रन आउट हुए। भारत का दूसरा विकेट 316 रन पर गिरा | वही तीसरे विकेट के रूप में आये रविन्द्र जडेजा ने केवल 10 रन बनाये और 43.2 ओवर में रसेल की गेंद पर रामपॉल को कैच दे बैठे। जिससे भारत का तीसरा विकेट महज 341 रन पर गिरा | भारत की तरफ से ताबड़ तोड़ बल्लेबाजी करने वाले वीरेन्द्र सहवाग का विकेट 46.3 ओवर में गिरा | सहवाग 219 रन बनाकर पोलार्ड की गेंद पर मार्टिन के हाथों कैच आउट हुए | आउट होने से पहले सहवाग ने वनडे में 200 रनों का विश्व रिकार्ड बनाने वाले सचिन का न केवल रिकार्ड तोडा बल्कि 219 रनों का एक नया विश्व रिकार्ड भी बनाया | भारत की तरफ से रोहित शर्मा ने 27 रन जब की कोहली ने नाबाद 13 रन और पटेल के नाबाद 3 रन का योगदान दिया | भारत ने 50 ओवर में 419 रन बनाये | वेस्टइंडीज की तरफ से कीमर रोच, रसेल और पोलार्ड को 1-1 विकेट लिए।



मानेन्द्र कुमार भारद्वाज