Friday, December 16, 2011

पार्टियों का लोकपाल समर्थन एक दिखावा ?



जिस लोकपाल बिल को अन्ना हजारे शीतकालीन सत्र में आने और पारित हाने की उम्मीद लगाये बैठे थे वह उम्मीद अब अन्ना हजारे की टूटती हुई नजर आ रही हैं | जिसके लिए अन्ना हजारे एक बार फिर अनशन पर जाने की बात कहकर यह कोशिश कर रहे है कि सरकार शीतकालीन सत्र के बचे हुए दिनों में बिल को पेश कर पारित करवाएं | जो नामुमकीन सा दिख रहा है | दरसल संसद का शीतकालीन सत्र 22 दिसंबर को ख़त्म हो रहा है | जिससे बिल का पारित होना आसान  नहीं दिख रहा है | अन्ना का कहना है कि अगर लोकपाल बिल पारित होने में ज्यादा समय लगता है तो संसंद को शीतकालीन सत्र को बढाना चाहिए |

अभी पिछले दिनों अन्ना हजारे ने लोकपाल विधेयक को राजनीतिक ताकत दिलाने के लिए जंतर - मंतर पर राजनेताओं के साथ एक दिन का महाबहस किया | जिसमे कई पार्टियों के नेताओं ने पहुँच कर अपना समर्थन लोकपाल बिल के पक्ष में जताया | अन्ना हजारे ने लोकपाल बिल पास होने में होने वाली देरी के लिए केंद्र सरकार को दोषी ठहराया | जिसके बाद अन्ना हजारे की टीम की कोर कमेटी ने आगे की रणनीति के लिए बैठक किया | जिसमे अन्ना हजारे ने सरकार को यह बताने कि कोशिश की कि अगर 20 दिसंबर को संसद में लोकपाल बिल पर बहस नहीं हुई तो वह 27 दिसंबर को मुंबई में फिर से अनशन शुरू करेंगे |

जिसके लिए केंद्र सरकार ने सभी पार्टियों के नेताओ के साथ लोकपाल के मुद्दे पर बात करने के लिए सर्वदलीय बैठक किया | जिसका नतीजा तो यही दर्शाता है कि अभी निकट भविष्य में आम पार्टियों में सहमती नहीं है | जो नेताओं की तरफ इस बात का इशारा करता है कि हाथी के दांत खाने को कुछ और दिखने को कुछ और है | जो लोकपाल का समर्थन तो करती है लेकिन जब बात आम सहमती की आती है तो वह सहमत ही नहीं होते हैं | ऐसे में कांग्रेस की हालत कुछ ठीक नहीं दिख रही है | क्यों कि कांग्रेस को पता है विरोधी पार्टिया ये नहीं चाहेंगी की लोकपाल पारित हो क्यों कि अगर लोकपाल बिल पारित नहीं होगा तो उन्हें होने वाले चुनाव के लिए एक ऐसा मुद्दा मिल जायेगा जिससे जनमत हासिल करने का एक आसान सा कार्य होगा | जिसके लिए पार्टियों ने तो अन्ना के साथ होने की बात तो कर रहे है, साथ में ये भी कोशिश कर रहे है कि लोकपाल अभी फ़िलहाल शीतकालीन सत्र में पास न हो | शायद यही वजह है कि अब तक कई राज्यों के मुख्य मंत्री ने अन्ना के साथ होने की बात कह कर आगामी चुनाव में भ्रष्टाचार और अन्ना के साथ होने की बात उठाकर अपना उल्लू सीधा करेंगे | जिसका एक कारण ये भी हो सकत है कि ये पार्टियों लोकपाल बिल में प्रधान मंत्री , सीबीआई , ग्रुप 'सी' और 'डी' के कर्मचारियों के मामले को उठाकर टालने की कोशिश कर रही हो |

प्रधान मंत्री के मुद्दे को लेकर कुछ पार्टियों का मानना है कि प्रधान मंत्री को लोकपाल के दायरे में नहीं आना चाहिए तो वही ज्यादा पार्टियों का मानना है कि कुछ प्रावधानों और सावधानियों के साथ प्रधान मंत्री को लोकपाल के दायरे में आना चाहिए | कुछ लोग इस बात को लेकर असहमत है कि सीबीआई को लोकपाल को दायरे में नहीं आना चाहिए | वही कुछ पार्टियों का कहना है कि सी बी आई को सरकारी नियंत्रण के मुक्त होना चाहिए लोगों को इस बात के लेकर मतभेद है कि अगर ऐसा हुआ तो सीबीआई का लोकपाल से कैसा संबंद होगा | पार्टियों के बीच मतभेद का एक और मुद्दा है | वह है ग्रुप 'सी' और 'डी' के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने का | क्यों की टीम अन्ना का कहना है कि भ्रष्टाचार का सामना अधिकांस लोगों को ग्रुप 'सी' और 'डी' के कर्मचारियों से करना पड़ता है | इस लिए इसे लोकपाल के दायरे में लाना चाहिए | वही सरकार इन ग्रुप 'सी' और 'डी' के कर्मचारियों के लिए अलग कानून बनाने के पक्ष में है |

अन्ना हजारे और उनके सहयोगियों के साथ इस समय जनता का समर्थन भले ही हो लेकिन सच्चाई ये भी है कि संसद में जनता के द्वारा भेजे गए सांसदों के द्वारा ही लोकपाल बिल को पारित किया जायेगा | ऐसे में सांसदों का यह दाइत्व बनता है कि सांसद जनता के भरोसे को कायम रखते हुए एक प्रभावी लोकपाल बिल संसद में पेश करे जिससे जनता का भला हो सके |




मानेन्द्र कुमार भारद्वाज

Wednesday, December 14, 2011

अधर में लटका ड्रीम प्रोजेक्ट



 सोनिया गाँधी का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जाने वाला खाद्य सुरक्षा बिल की मांग अभी फ़िलहाल अधर में लटकता हुआ दिख रहा है | जिसको महीनों की बातचीत के बाद राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (रासप) ने एक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा बिल की सिफारिश की थी | जिसमे देश के गरीब और असहाय लोगों को सरकार की तरफ से खाद्य मुहैया करने को कहा गया है | जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का प्रस्ताव है कि भारत की आबादी के कम से कम तीन चौथाई हिस्से के लिए, जिसमें 90 प्रतिशत ग्रामीण और 50 प्रतिशत शहरी आबादी आती है, सरकारी अनुदान पर अनाज उपलब्ध कराने के लिए कानून बनाया जाए। इसके अन्तर्गत 75 प्रतिशत को पूर्वाधिकार परिवार और सामान्य परिवारों में बांटा जाना है।

जिसके अंतर्गत आने वाले परिवार को हर महीने एक रुपये प्रति किलोग्राम की दर से 35 किलो अनाज-(ज्वार, बाजरा आदि) दो रुपये की दर से गेंहू और तीन रुपये की दर से चावल पाने के अधिकारी होंगे जबकि आम परिवारों को 20 किलो पाने का अधिकार होगा, जिसका मूल्य हालिया न्यूनतम समर्थन मूल्य के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा, जो आजकल साढ़े पांच-छह रुपये प्रति किलोग्राम पड़ता है। इस ड्रीम प्रोजेक्ट के अंतर्गत 14 साल के लड़के और लडकियों तथा गर्भवती महिलाओं के लिए नगद सहायता का प्रावधान है |

सोनिया गाँधी का ड्रीम प्रोजेक्ट इतना बड़ा है कि देश का एक बड़ा भाग इसके अंतर्गत आ जाता है | जिसके लिए उतनी ही ज्यादा अनाज की आवश्यकता भी होगी | जो करीब 20 से 25 मिलियन टन अतिरिक्त अनाज की जरूरत होगी। देश की जनता के लिए यह बात बहुत अच्छी है लेकिन इस प्रोजेक्ट को आन्न - फन्ना में बनाने के कारण इसमें बहुत सी कमियां है | कुछ लोगों का ये भी कहना है कि सोनिया ये प्रोजेक्ट को लाकर पार्टी की छवि को सुधारने का प्रयास है | जो कि एक चुनावी हथकंडा है |

कई लोगों ने खाद्य सुरक्षा बिल की कमियों को लेकर विरोध है | इस मामले में कृषि, खाद्य व उपभोक्ता मामलों के मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने पहले ही अपने बयान में यह कह दिया था कि अगर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के चहेते खाद्य सुरक्षा विधेयक को कानून बना दिया गया तो देश राजकोषीय घाटे के दलदल में घंस जाएगा।

उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत अगर गरीब परिवारों को महीने में 25 किलो अनाज दिया जाता है तो सरकार को 76720 करोड़ रुपए की खाद्य सब्सिडी देनी पड़ेगी। अगर 35 किलो अनाज दिया जाता है तो खाद्य सब्सिडी का बोझ 1.07 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा। उदाहरण के तौर पर विधेयक के मुताबिक गरीब परिवारों को दो रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से गेहूं दिया जाना है, इससे सरकार के ऊपर प्रति किलो 17 रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। इससे राजकोषीय घाटे को संभालने का सारा गणित चौपट हो सकता है। चालू वित्त वर्ष 2010-11 में खाद्य सब्सिडी के लिए 55,578 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

पवार ने कहा कि अगर खाद्य सुरक्षा कानून के चलते ज्यादा सब्सिडी देनी पड़ी तो हम 2012-13 तक राजकोषीय घाटे को जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के 4.1 फीसदी तक लाने का लक्ष्य नहीं हासिल कर पाएंगे।

लेकिन इस कानून का समर्थन करनेवालों का कहना है कि इससे देश के 40 करोड़ गरीबों को भुखमरी से बचाया जा सकता है। साथ ही यह कि सरकारी खरीद का लाखों टन अनाज अभी बरबाद होता रहता है, जिसका आगे सदुपयोग किया जा सकता है।

जाहिर है योजन का स्वरुप काफी बड़ा है | ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि जब देश में महंगाई और आर्थिक मंदी जैसे संकट है तो इस योजना के लिए इतना पैसा (1 लाख 10 हज़ार करोड़ रुपए की जरूरत होगी) कहा से आयेगा | एनएसी के अनुमान के मुताबिक सरकार को इस योजना के लिए करीब 28 हजार करोड़ की अतिरिक्त सब्सिडी देनी होगी। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि मौजूदा राशन की दुकानों से इसे कैसे लागू किया जाएगा।

जहाँ देश में करीब 40 प्रतिशत लोग 20 रुपये में गुजर- बसर करने के किये मजबूर है तथा जहाँ अभी गरीबी की परिभाषा भी सुनिश्चित नहीं है | वहां पर यह कैसे निर्धारति किया जायेगा कि कौन गरीब है | राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (रासप) की माने तो गरीबो को पूर्वाधिकार परिवार और सामान्य परिवारों में बांटा जाना है। जिसका विभाजन जाति जनगण के आधार पर किया जाना है | जब की जाति जनगण के लिए कोई समय सीमा ही नहीं तय किया गया है | ऐसे में जरुरत मंद कौन है इसका पहचान कैसे किया जा सकता है | ऐसे में जरुरत मंद को अनाज नहीं मिला तो वह कहा पर जाकर शिकायत करेगा यह भी निश्चित नहीं है |

खाद्य सुरक्षा बिल बिल देश के लिए बहुत जरुरी है लेकिन उससे भी ज्यादा जरुरी यह है कि अन्य योजनो की तरह यह योजन भी लोगों के भ्रष्टाचार का शिकार न बन जाये इसके लिए जरुरी है कि कोई भी योजना लागू करने के पहले उसके अच्छाइयों और बुराइयों पर पहले गहन मंथन हो | जिसके बाद एक प्रभावी योजना पारित हो जिससे देश की जनता लाभान्वित हो सके |




मानेन्द्र कुमार भारद्वाज

Tuesday, December 13, 2011

मायावती के दौरे में पैसों की बर्बादी हो रही है - राहुल गांधी

                        

लखनऊ- कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी एक बार फिर यूपी में अपना चुनावी दौरा तेज कर दिया है | दिल्ली से सीधे यूपी के नवगठित जिलों भीमनगर और बदायूं से अपने दौरे की शुरुआत करते हुए राहुल ने लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जब तक आप जागोगे नहीं, उठोगे नहीं और लड़ोगे नहीं, तब तक पिछड़ते ही रहोगे। हम यहां आएंगे, दुर्दशा देखेंगे, गुस्सा-दुखी होंगे, लेकिन हमारे हाथ भी बंधे होंगे।

राहुल गाँधी बसपा सरकार को अपना निशाना बनाते हुए कहा कि यूपी में मनरेगा के अरबों रुपये इधर से उधर करने के साथ ही एनआरएचएम में तीन हजार करोड़ रुपये खा लिए गए, जिन्हें आपके के लिए ही केंद्र ने भेजे थे। इसे तरह के घोटाले आप ही रोक सकते हैं। इसलिए स्वयं को मजबूत कीजिए।

राहुल गाँधी ने लोगों से कहा कि वे अपने मतों का प्रयोग सोच समझ कर करे | सरकार उसी की बनाओ जो आपके हितो का पूरी तरह से ख्याल रखे | लोग जाति- धर्म के नाम पर लोगों को लूट रहे है |

कुछ दिनों पहले राहुल गाँधी ने मायावती के दिए गए बयान कि राहुल गरीबो के बीच जाने का ढोंग और नौटंकी कर रहे है , का जवाब देते हुए राहुल ने कहा कि मैं गांवों-गरीबों के बीच इसलिए जाता हूं कि उन लोगों का दर्द नजदीक से जान सकूं और उनकी तरक्की के लिए कुछ कर सकूं। बीएसपी पर कटाक्ष करते हुए वे बोले कि मायावती के दौरे में पैसों की बर्बादी हो रही है, क्योंकि हेलिकॉप्टर में बैठे-बैठे गरीबों के दर्द को नहीं समझा जा सकता।

राहुल गाँधी ने अपने दौरे के दौरान दिए गए भाषण में कहा था कि अगर यूपी में उनकी सरकार बनी तो वह पाँच सालो में यूपी की सूरत बदल देंगे , पर दूबारा जोर देते हुए कह कि मैं लिखकर देने को तैयार हूं कि अगर आपने हमारा साथ दिया तो हम अगले दस सालों में यूपी का भविष्य बदल देंगे।



मानेन्द्र कुमार भारद्वाज

Monday, December 12, 2011

क्या अन्ना लाट साहब हैं ? उन्हें यूपी आने दीजिए, देख लेंगे - बेनी प्रसाद वर्मा



समाज सेवी अन्ना हजारे के जंतर - मंतर पर हुए एक दिन के उनशन के दौरान राहुल गाँधी पर हजारे के किये गए बयान से तिलमिलाई कांग्रेस सरकार ने अन्ना हजारे पर हल्ला सा बोल दिया है | आंध्र प्रदेश से कांग्रेस सांसद हनुमंत राव ने टीम अन्ना पर पलटवार करते हुए कहा है कि वे कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी पर हमले से बाज आए। वही इस्पात मंत्री ने कहा, ' क्या अन्ना लाट साहब हैं ? उन्हें यूपी (चुनाव में) आने दीजिए, देख लेंगे। वह 75 के हैं, तो कांग्रेस 125 साल पुरानी है। ' उन्होंने कहा, ' विपक्ष राहुल से डरा हुआ है और अन्ना उसके प्रवक्ता बन गए हैं, खासतौर से संघ के। '

रविवार को जंतर - मंतर पर एक दिन के अनशन के दौरान लोकपाल बहस में अन्ना ने राहुल के ऊपर निशाना साधते हुए कहा था कि लोकपाल में जनता की मांगे शामिल नहीं की गई , जबकि इसके किये पूरी संसद ने रजामंदी दी थी | ऐसे में सवाल है कि , जो सरकार पर दबाव बना सकता है | अगर वह (राहुल) पीएम बनाने का सपना देख रहे हैं तो उन्हें बहुत कुछ करना होगा | एक दिन झोपड़ी में रहना ही काफी नहीं है | जिसके बाद सोमवार को कांग्रेस के नेताओ ने समाजसेवी अन्ना हजारे पर चौतरफा हमला तेज कर दिया ।

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने अन्ना हजारे पर हमला बोलते हुए कहा कि , ' टीम अन्ना, बाबा रामदेव और श्री श्री रविशंकर सभी के इरादे राजनीतिक हैं। भ्रष्टाचार कोई मुद्दा ही नहीं है। वे कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाना चाहते हैं। राहुल गांधी ने लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने की बात कही, तो सबने मजाक बनाया, लेकिन अब टीम अन्ना भी इससे सहमत है। '




मानेन्द्र कुमार भारद्वाज



Thursday, December 8, 2011

सहवाग के दोहरे शतक से भारत चौथा वनडे जीता

इंदौर के होल्कर क्रिकेट स्टेडियम में वेस्टइंडीज और भारत के बीच खेले गए पांच वनडे मैचो के चौथे मैच में भारत के सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के तूफानी बल्लेबाजी के बदौलत भारत ने वेस्टइंडीज को 153 रनों से पराजीत कर दिया | वनडे मैच में 219 रनों का विश्व रिकार्ड बनाने वाले वीरेंद्र सहवाग को मैन ऑफ द मैच चुना गया | इस जीत के साथ भारत ने पांच वनडे मैच की सीरीज में 3-1 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है |

भारत द्वारा दिए गए निर्धारित 50 ओवर में 419 का विशाल स्कोर का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुवात कुछ खास नहीं रही और वेस्टइंडीज का पहला विकेट 1.6 ओवर में महज 13 रन पर किरन पॉवेल के रूप में गिरा | जिन्होंने केवल टीम के लिए 7 रन बनाये और रन आउट हो गए | वही वेस्टइंडीज का दूसरा विकेट सिमांस के रूप में गिरा | सिमांस 36 रन बनाकर जडेजा की गेंद पर पार्थिव के हाथों कैच हो गए | तो वही अपना पहला मैच खेल रहे राहुल शर्मा ने अपने पहले ही ओवर में सैमुअल्स को 33 के स्कोर पर पवेलियन भेज दिया। सैमुअल्स का विकेट 11.6 ओवर में 81 रन पर गिरा | जिसके बाद वेस्टइंडीज के चौथा विकेट डंजा हयात (11) के रूप में राहुल शर्मा ने लिया | जब कि वेस्टइंडीज का पांचवा विकेट 15.6 ओवर में किरन पोलार्ड को 3 रन के स्कोर पर राहुल शर्मा ने बोल्ड किया। तो वही पटेल ने विकेट के पीछे से अपना कमाल दिखाते हुए 23.2 ओवर में एंड्रे रसेल को 29 रन पर रैना की गेंद पर स्टंप आउट कर वेस्टइंडीज को छठा झटका दिया | इस विकेट के बाद वेस्टइंडीज का स्कोर 6 विकेट पर 140 रन था | इसके बाद वेस्टइंडीज की टीम कुछ खास न कर सकी और उसकी पूरी टीम 49.2 ओवर में 265 रनों पर सिमट गई | वेस्टइंडीज की तरफ से रामदीन ने सबसे ज्यादा 96 रन बनाये वही सैमी ने 2 रन , रवि रामपॉल ने 10 रन , , कीमर रोच ने 7 रन, नारिने ने नाबाद 27 रन बनाये |
भारत की तरफ से अपना पहला वनडे खेल रहे राहुल शर्मा और जडेजा को 3-3 विकेट मिले। इसके अलावा रैना को 2 विकेट मिले जबकि अश्विन ने 1 विकेट मिला।

भारत ने बनाये 419 रन

सीरीज में लगातार तीन बार टाँस जीतने वाले भारतीय कप्तान वीरेन्द्र सहवाग ने जैसे ही चौथे मैच में वेस्टइंडीज के कप्तान सैमी से टाँस जीता मैदान पर उपस्तिथ सभी दर्शक हँसाने लगे | वीरेन्द्र सहवाग ने पिछली हार को ध्यान में रखते हुए इस बार पहले बल्लेबाजी का फैसला किया | भारतीय पारी का शुरुवात करने आये सलामी बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग और गौतम गंभीर ने भारत को एक मजबूत शुरुवात दी | भारत का पहला विकेट 176  रन पर गंभीर के रूप में गिरा | गंभीर 67 रन बनाकर रन आउट हुए | सहवाग ने दूसरे विकेट के रूप में आये सुरेश रैना के साथ अपना धुंवा - धार पारी खेलना जारी रखा | रैना ने भी सहवाग का भर पुर साथ दिया लेकिन 40.2 ओवर में रैना 55 रन बनाकर रन आउट हुए। भारत का दूसरा विकेट 316 रन पर गिरा | वही तीसरे विकेट के रूप में आये रविन्द्र जडेजा ने केवल 10 रन बनाये और 43.2 ओवर में रसेल की गेंद पर रामपॉल को कैच दे बैठे। जिससे भारत का तीसरा विकेट महज 341 रन पर गिरा | भारत की तरफ से ताबड़ तोड़ बल्लेबाजी करने वाले वीरेन्द्र सहवाग का विकेट 46.3 ओवर में गिरा | सहवाग 219 रन बनाकर पोलार्ड की गेंद पर मार्टिन के हाथों कैच आउट हुए | आउट होने से पहले सहवाग ने वनडे में 200 रनों का विश्व रिकार्ड बनाने वाले सचिन का न केवल रिकार्ड तोडा बल्कि 219 रनों का एक नया विश्व रिकार्ड भी बनाया | भारत की तरफ से रोहित शर्मा ने 27 रन जब की कोहली ने नाबाद 13 रन और पटेल के नाबाद 3 रन का योगदान दिया | भारत ने 50 ओवर में 419 रन बनाये | वेस्टइंडीज की तरफ से कीमर रोच, रसेल और पोलार्ड को 1-1 विकेट लिए।



मानेन्द्र कुमार भारद्वाज

Wednesday, December 7, 2011

सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर लगाम, मूलभूत अधिकारों का हनन





केंद्र सरकार को अभी अन्ना के जनलोकपाल बिल से निजात मिला भी नहीं था कि सरकार महंगाई और एफडीआई के चक्र में कुछ इस तरह फंसी की पुरे देश में केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध देखने को मिला | लिहाजा केंद्र सरकार मौजूदा दौर में अपने आप को पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव में अपनी गिरती शाख को बचाने के लिए सरकार ने एफडीआई मसले पर पुनः विचार करने की बात कह कर कुछ मामले को शांत करने की कोशिश कर ही रहा था कि सोशल नेटवर्किंग के नियंत्रण के मामले ने एक बार फिर केंद्र सरकार को लोगों के आलोचनाओ का पत्र बना दिया |

दरअसल सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर लगातार केंद्र सरकार के खिलाफ लोगों की तीखी प्रतिक्रियाओं को देखकर केंद्र सरकार ने फेसबुक, गूगल और ऑरकुट जैसी कई सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर शिकंजा कसने की बात कह दी | जिसे दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने धार्मिक आस्थाओं के साथ खिलवाड़ की बात कह कर इन वेबसाइटों पर लगाम लगाने की बात कही क्यों कि भारत में दस करोड़ लोग सोशल साइटों का प्रयोग करते है | जिससे जाहिर सी बात है कि इतने ज्यादा लोगों का सरकार के प्रति नाराजगी से केंद्र सरकार को लगा होगा की आगामी चुनाव परिणाम पर इसका बुरा असर पड़ सकता है | इसके लिए सरकार ने फेसबुक, गूगल और ऑरकुट जैसी कई सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों वाली कंपनी से इनपर रोक लगाने को कहा है | सरकार ने ये भी कहा  अगर यह वेबसाइटे ऐसा नहीं करती है तो वह इसके खिलाफ कानून भी बनायेंगे |

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत तमाम कांग्रेस नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों और तस्वीरों को लेकर सरकार को ऐतराज है लेकिन देश की जनता की खून पसीने की कमाई जब सफ़ेद कुर्ते और सरकारी मुलाजिम डकार कर हजम कर जाते है तो उनको इस बात के लिए ऐतराज नहीं होता है | अगर ये बात उनसे पूछा जाय तो वह बड़े चतुराई से ये कहेंगे कि इसके लिए कानून है और हम क़ानूनी कार्यवाही कर रहे हैं | तो साहब साइबर क्राइम के लिए और गलत , अश्लील या गन्दी सामग्री वेबसाइटों पर डालने के लिए भी कानून है फिर अलग से कानून बनाने की क्या जरुरत है | अगर आप को गलत और अश्लील या भद्दे सामग्री वेबसाइट पर डालने वाले के खिलाफ कार्यवाही करनी है , तो आप आरटीआई की धारा -79 के तहत क़ानूनी कार्यवाही कर सकते हैं | रही बात कानून बनाने की तो अभी सरकार के लिए जन लोकपाल का बिल पड़ा हुआ है |


देश में व्यक्ति को स्वतंत्र अभिव्यकित की पूरी आजादी है लेकिन जिस तरह से केंद्र सरकार अपने हथकंडे अपना रही है उससे तो नहीं लगता है कि देश में स्वतंत्र अभिव्यकित की पूरी आजादी है | सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटे एक ऐसी साइट है जहाँ पूरी दुनिया के लोग बिना किसी डर के अपनी राय रखते हैं और अपना गुस्सा  जाहिर करते हैं | ऐसे में कभी - कभी लोग अपशब्द शब्दों का प्रयोग भी कर देते है | जो गलत है, लेकिन इसके लिए कोई अलग कानून बनाये ये कहा तक सही है |

सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट लोगों को आपस में जोड़ने में महत्त्व पूर्ण भिमिका निभाता है | अरब क्रांति के दौरान इन साइटों ने लोगों को एक मंच पर लाने में महत्त्व पूर्ण योगदान दिया है | अन्ना का आन्दोलन हो या फिर तुर्की और जापान में आये इस साल विनाशकारी भूकंप में लोगों को आपस में मिलाने का काम हो लोगों ने इस साइटों के प्रयोग से एक दुसरे की खैरियत जानी | खुद केंद्र सरकार भी पिछले चुनाव में इन साइटों का बखूबी प्रयोग किया है |

हर चीज के दो पहलू होते है एक अच्छा दूसरा बुरा | ये तो प्रयोग करने वाले पर निर्भर करता है कि वह किस कार्य के लिए इसका प्रयोग कर रहा है | जनवरी 2008 में खुलासा ,फेसबुक पर खालिस्तान समर्थको ने बना रखे है पेज | फ्लिकर पर कई आपतिजनक तस्वीरों के पोस्ट किया गया है | तो वही कश्मीरी अलगावादियों ने अपने कई ब्लॉग बनाये है जिस पर इस मसले पर चर्चा होता है | तो वही सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर मौजूदा समय में सबसे ज्यादा 60 प्रतिशत छात्र पढाई के बारे में बात करते है | रही बात सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर लगाम लगाने की तो कई लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया रही है | क्यों कि सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों का फैलाव इतना बड़ा है कि इसपर नजर रखन काफी नामुम्किन सा दिखता है | ऐसे में लोगों से यही कह जा सकता है कि वह ऐसी तस्वीरे और भाषा का प्रयोग न करे जो मानवता का का उल्लंघन करे | लेकिन अगर सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर व्यक्त टिपणीयों पर लगाम लगाया तो ये कही न कही लोगों के मूलभूत अधिकारों का हनन होगा |



मानेन्द्र कुमार भारद्वाज
(ये लेखक के अपने विचार है | )

Monday, December 5, 2011

वेस्टइंडीज ने भारत को 16 रनों से हराया



अहमदाबाद के मोटेरा स्थित सरदार पटेल स्टेडियम में वेस्टइंडीज और भारत के बीच खेले गए पांच वनडे मैचो के तीसरे मैच में वेस्टइंडीज के गेदबाज रवि रामपॉल के घातक गेदबाजी के बदौलत वेस्टइंडीज ने भारत को 16 रनों से पराजीत कर दिया | मैच में 4विकेट लेने वाले रवि रामपॉल को मैन ऑफ़ द मैच चुना गया | इस जीत के साथ वेस्टइंडीज ने 5 वनडे मैच की सीरीज में अपनी पहली जीत दर्ज की | सीरीज में भारत अभी भी 2-1 से आगे है |

भारतीय कप्तान वीरेंद्र सहवाग ने लगातार तीसरी बार टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला उस समय महंगा साबित हो गया जब लक्ष्य का पिक्षा करने आये वीरेन्द्र सहवाग बिना खाता खोले रामपॉल की गेंद पर रामदीन को कैच देकर चलते बने। उस समय भारत का स्कोर 1.1 ओवर में महज 8 रन था |

पारी को संभालने आये गौतम गंभीर भी कुछ खास नही कर सके और रामपॉल की अगली गेंद का शिकार हो गए | जिसकी वजह से रामपॉल हैट्रीक के करीब पहुंचे रामपॉल की गेंद को विराट कोहली ने रोक कर हैट्रीक होने से कुछ देर के लिए तो बचा लिया लेकिन कोहली भी कुछ खास नहीं कर सके और 20 रन बनाकर सुनील नरैन की गेंद पर एलबीडब्‍ल्यू आउट हो गए |

भारतीय टीम के विकेट गिराने का सिलसिला यही थमा नहीं रसेल की गेंद पर पार्थिव पटेल (39 रन) क्लीन बोल्ड हो गये | तो वही सुरेश रैना 2 रन बनाकर रामपॉल की गेंद पर कैच दे बैठे | भारत की आधी टीम महज 16 ओवर में (84/5) ढेर हो गई |

रोहित शर्म ने जडेजा के साथ मिलकर स्कोर कुछ आगे बढाया लेकिन रामपॉल की नोबाल गेंद से बचे जडेजा 11रन बनाकर आउट हो गए | जिसके बाद रोहित शर्मा ने अश्विन के साथ संभल कर खेलते हुए अपना अर्धशतक लगाया और टीम का स्कोर 30 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर 142 रन पहुँचाया | रोहित शर्मा ने आश्विन के साथ 91 रनों की साझेदारी की | भारत की तरफ से आश्विन ने 31 रन रोहित शर्मा ने 95 रन ,अभिमन्यु मिथुन 23 रन , विनय कुमार 3 रन बनाये और भारतीय टीम 46.5 ओवर में 244 रन बनाकर ऑल आउट हो गई।

वेस्टइंडीज की तरफ से रवि रामापॅल ने सबसे अधिक चार विकेट लिए। इसके अलावा नारिने ने दो विकेट, रोच और सैमुअल्स ने एक-एक विकेट लिए।


वेस्टइंडीज ने बनाए 260 रन

टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी वेस्टइंडीज टीम की शुरुवात भी कुछ खास नहीं रही | वेस्टइंडीज की तरफ से वोपनिग करने आये सिमोंस 2.4 ओवर में 1 रन बनाकर विनय कुमार की गेंद पर पार्थिव को कैच दे बैठे | तो वही वेस्टइंडीज का दूसरा विकेट हयात के रूप में गिरा हयात 20 रन बनाकर अभिमन्यु मिथुन की गेंद पर विकेट के पीछे लपके गए। उस समय वेस्टइंडीज का स्कोर 13.1 ओवर में 42 रन पर 2 विकेट था | लेकिन सैमुअल्स के 58 रनों और कप्तान सैमी ने 17 गेंद पर ताबड़तोड़ नाबाद 41 बनाये जब कि रसेल ने महज 18 गेंदों पर नाबाद 40 रन बनाये जिसकी बदौलत वेस्टइंडीज टीम ने 50 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 260 रन बनाये | सैमुअल्स 58 के स्कोर पर अश्विन की गेंद पर बोल्ड हो गए जब की रामदीन 38 रन बनाकर उमेश यादव की गेंद पर पटेल को कैच दे बैठे तो वही पोलार्ड 29 रन बनाकर विनय कुमार की गेंद पर जडेजा के हाथों कैच हुए |




मानेन्द्र कुमार भारद्वाज

स्मृति



                                                  देव आनंद | 26 सितम्बर 1923 - 04 दिसम्बर 2011 |

देव साहब की सदाबाहर
फिल्में सदा याद दिलाएंगी उनकी



1950 के दशक में हिंदी फिल्म की दुनिया में एक ऐसा चेहरा था जिसने हिंदी फिल्म की दुनिया की तस्वीर ही बदल दी थी | उनकी लोकप्रियता का आकलन इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब वह देश के किसी भी शहर में जाते तो उनके चाहने वालो में पुरुषो से ज्यादा महिलये होती थी | उनके स्मार्टनेश की लडकियां इतनी दीवानी थी कि देव आनंद साहब का लड़कियों से बचकर निकलना सबसे बड़ा मुश्किल काम था | अगर हम ये कहे कि देवानंद ने तो युवाओ को स्मार्ट बनाया तो कोई गलत बात नहीं होगी | क्यों कि देव साहब में लडकियों की बढ़ती दिलचस्पी को देखकर तब के युवो उनके जैसे दिखने के लिए उनके हर एक स्टाइल की कॉपी किया करते थे | देव आनंद और सुरैया की जोड़ी ने फिल्मो में कई हित फिल्मे दिए | देव साहब सुरैया को अपना जीवन साथी बनाना चाहते थे लेकिन सुरैया की नानी के विरोध के कारण दोनों एक न हो सके | जिसके बाद देव आनंद ने कल्पना कार्तिक से शादी कर ली | लेकिन सुरैया की याद उनके दिलो में हमेसा रही | देव आनंद अपने जीवन के अंतिम क्षणों में भी सुरैया को यादकर भावविभोर हो गए थे | अभिनय के प्रतिभा के धनी देव आनंद ने 4 दिसंबर 2011 को अपनी आँखे हमेसा के लिए बंद कर लिया |

देवानंद साहब का फ़िल्मी जगत में शुरुवात काफी संघर्ष पूर्ण था | । 26 सिंतबर 1923 को पंजाब के गुरदासपुर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे धर्मदेव पिशोरीमल आनंद उर्फ देवानंद का झुकाव पिता के पेशे वकालत की ओर नहीं होकर अभिनय की ओर था। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की शिक्षा 1942 में लाहौर के मशहूर गवर्नमेंट कॉलेज मे पूरी की। देवानंद आगे भी पढ़ना चाहते थे लेकिन पिता ने साफ शब्दों में कह दिया कि उनके पास पैसे नहीं है और यदि वह आगे पढ़ना चाहते है तो नौकरी कर लें।देवानंद ने निश्चय किया कि अगर नौकरी ही करनी है तो क्यों न फिल्म इंडस्ट्री में किस्मत आजमाई जाए। अपने सपनों को साकार करने के लिए देवानंद साहब मुंबई आ गए जहाँ पर उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा |

1945 में प्रदर्शित फिल्म ‘हम एक हैं’ से बतौर अभिनेता देवानंद ने अपने सिने कैरियर की शुरुआत की। जिसके बाद देव आनंद ने कभी मुड़कर पीछे नहीं देखा और भारतीय सिने जगत में लगभग छह दशक से दर्शकों के दिलों पर राज करते रहे | देवानंद ने कई सुपरहीट फिल्में की जिसमे मधुबाला (1950), बिरहा की रात (1950), नादान (1951), सज़ा (1951), इंसानियत (1955), पॉकेटमार (1956), कालापानी (1958), सरहद (1960), मंजिल (1960), तेरे घर के सामने (1963), गाइड (1965), ज्वेल थिफ (1967), जॉनी मेरा नाम (1970), हरे रामा हरे कृष्ण (1971), हीरा पन्ना (1973) जैसी फिल्मो में अपने अभिनय का लोहा मनवाया | देवानंद को सबसे पहला फिल्म फेयर पुरस्कार वर्ष 1958 में प्रदर्शित फिल्म कालापानी के लिए दिया गया। इसके बाद 1965 में भी देवानंद फिल्म गाइड के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किए गए। देव आनंद के इस कार्य के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2001 पद्म भूषण सम्मान एवं 2002 में हिंदी सिनेमा में महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

यह बात बहुत कम ही लोग जानते है कि देव आनंद राजनीति में भी आना चाहते थे | इमरजेंसी के दौरान देव आनंद ने नॅशनल पार्टी आँफ इंडिया का गठन किया | इसके बैनर तले उन्होंने इ सिर्फ इमरजेंसी का विरोध किया बल्कि बाद में जब 1977 में आम चुनाव हुए तो इंदिरा जी के विरोध में प्रचार किया लेकिन जल्द ही देव आनंद का राजनीति से मोह भंग हो गया | कुछ दिनों बाद उन्होंने अपनी पार्टी भंग कर दी और दुबारा राजनीति में कदम नहीं रखा |

देव आनंद का लगाव फ़िल्मी जगत से इतना ज्यादा था कि देव साहब ने अपने ढलती उम्र के बाद भी सेन्सर (2001), लव एट टाइम्स स्कवेयर (2003),अमन के फ़रिश्ते (2003), मि. प्राइम मिनिस्टर (2005) और देव आनंद नें मूवी चार्जशीट (2011) में अभिनय किया. इस मूवी में देव आनंद नें "CBI Officer" की भूमिका निभाई | आज देव आनंद हमारे बीच भले न लेकिन उनकी सदाबहार फिल्मे हमें हमेसा उनकी याद दिलाती रहेगीं |



मानेन्द्र कुमार भारद्वाज
इंडिया हल्ला बोल