Friday, April 22, 2011

भंग हुई शांति भूषण की शांति

शांति भूषण
.भ्रष्टाचार के खिलाप कार्य करने के लिए जिन व्यक्तियों को अन्ना हजारे ने चुना था उन्ही में से कुछ यक्तियो के ऊपर सपा और कांग्रेश ने भ्रष्ट होने का आरोप लगा दिया है .इन दलों के नेताओ का कहना है की जिस शांति भूषण को भ्रष्टाचार के खिलाप लड़ने का सदस्य बनाया गया है वह खुद ही भ्रष्ट है ऐसे में जनता उनपर कैसे भरोषा करेगी . जिससे उन्हें लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने वाली समिति से हट जाना चाहिए  . सपा और कांग्रेश ने शांति भूषण और उनके बेटे जयंत भूषण पर नोयडा के पास आवंटित फार्म हाउस पर सवाल उठा  दिए है . इन विवादों के बीते अभी ज्यादा समय भी नहीं  हुआ था की अमर सिंहने भी एक नया आरोप उनके सिर पर मढ़ दिया  अमरसिंह का आरोप है की  २००६ में उत्तर प्रदेश की मुलायम सिंह  सरकार को बचाने के लिए शांति भूषण ने रूपये  लिए. ऐसे में सारी बात सीडी के फारेंसिक जाच से ही  साफ होगी.      
                                                                                         मानेन्द्र कुमार भारद्वाज


बढ़ा जुर्म घटी गरीबी


देश की आजादी से लेकर अब  तक हम लगातार विकास की नई सीढ़िया चढ़ते जा रहे है . आजादी के समय की बात की जय तो हमारे देश में भुखमरी और गरीबी ज्यादा थी . जो देश के लिए एक चुनौती थी लेकिन हम  ने अपने मेहनत के बल पर लगातार नयी उचाइओ को छुआ है और अपने देश के  विकास की गति को बढाया है .जिसे देख विकाशील देशो ने भी हमारी प्रशंशा की है  हमारे देश में गरीबी तो घटी  है पर  जुर्म  बढ़ा है .अगर आकडे की बात करे तो २००४-०५ में गरीबी ३७.२% थी जो २००९-१० में घट कर ३२% हो गई यह  आकलन तेंदुलकर समीति की ओर से सुझाया गए फर्मोले के आधार पर किया है . ऐसे में हम तो विकाश कर लेंगे लेकिन बढाते हुए जुर्म का क्या होगा . हमें और हमारी सरकार को इसके तरफ ध्यान देना होगा तभी देश में अमन और सुख शांति बनी रहेगी .


                  मानेन्द्र कुमार भारद्वाज