राजनीति में कब क्या हो जाये कुछ कहा नही जा सकता है | कभी कांग्रेस और दूसरी पार्टियों के ऊपर भ्रष्टाचार और भ्रष्ट नेताओं का आरोप लगाने वाली भाजपा ने यह कभी नहीं सोचा होगा की उसे अपने एक फैसले के कारण इतना ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ेगा की उसके किये कराये सारी मेहनत पर पानी फिर जायेगा | भ्रष्टाचार के खिलाफ दम भरने वाली भाजपा ने बसपा से निष्कासित यूपी के पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा को पार्टी में अन्दर क्या लिया की भाजपा के सारे दाव ही उल्टे पड़ गए |
दरअसल बाबू सिंह कुशवाहा, बादशाह सिंह जैसे बसपा से निष्किसित नेताओं को भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने पार्टी में यह सोच कर शामिल किया था कि उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग में पार्टी की पैठ बनाने के लिए बाबू सिंह कुशवाहा का पार्टी में होना उनके पार्टी के लिए काफी फायदे मंद होगा क्यों की कुशवाहा पिछड़े वर्ग से आते हैं | वही पार्टी के कुछ नेताओं ने नितिन गडकरी के इस फैसले का विरोध भी किया | जहाँ बाबू सिंह कुशवाहा के पार्टी में शामिल होने से मेनका गांधी और आदित्यनाथ आहत हुए तो वही बादशाह सिंह को लेकर उमा भारती गुस्सा हुई | पार्टी के अन्दर जहाँ इस बात को लेकर मतभेद है , वही बाहरी तरफ से भाजपा के नेता इस बात को लेकर बचाव करते हुए दिखते है कि उनकी पार्टी ने सही फैसला लिया है | लेकिन सचाई तो यह है कि लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली कुशवाहा को भाजपा में शामिल करने पर पहले से ही नाखुश थे।
बात कुछ भी हो लेकिन ये तो तय है कि गडकरी के इस फैसले ने विपक्ष को वार करने का एक मौका दे दिया है | ऐसे में कांग्रेस भला कैसे पीछे रहती | राहुल ने कहा कि बाबू सिंह कुशवाहा ने बीजेपी को खरीद लिया है। उन्होंने कहा की कुशवाहा बीएसपी से निकाले जाने के बाद सबसे पहले हमारे पास आए थे। कुशवाहा ने हमसे (कांग्रेस) कहा कि मुझे बचा लीजिए। कांग्रेस ने कुशवाहा का साथ देने से साफ इंकार कर दिया। कांग्रेस किसी भी भ्रष्टाचारी का साथ नहीं देगी। जो भी भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाएगा, चाहे वो कांग्रेस का हो या अन्य किसी पार्टी का। उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वही जनक्रांति पार्टी राष्ट्रवादी के संरक्षक कल्याण सिंह का कहना है कि कुशवाहा को पार्टी में शामिल करने के लिए भाजपा ने कोई बड़ी डील की है | जाँच सीबीआई से कराई जानी चाहिए , ताकि असलियत सामने आ सके |
अपने खिलाफ उठते सवालो को देख कर कुशवाहा एक बार फिर काफी मुश्किल में पड़ते जा रहे थे | ऐसे में अब बाबू सिंह कुशवाहा ने भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को चिट्ठी लिखकर अपनी सदस्यता स्थगित करने की मांग की है। कुशवाहा ने चिट्ठी में लिखा है कि मेरी सदस्यता फिलहाल स्थगित रखी जाए। साथ ही उन्होंने चिट्ठी में भाजपा को वोट देने की अपील भी की है। कुशवाहा ने बसपा, सपा और कांग्रेस पर पिछड़े वर्ग की अनदेखी का आरोप लगाया है।
ऐसे में कुशवाहा भाजपा के लिए गले में फंसी उस हड्डी की तरह है जिसे न अन्दर लिया जा सकता है और न ही बहार ही निकला जा सकता है | अपने इस परेशानी का जिम्मेदार खुद भाजपा ही है जिसने कुशवाहा को लेकर अपने पैर पर कुल्हाड़ी खुद मारी है |
मानेन्द्र कुमार भारद्वाज
