मानसून के आते ही मेरे मोहले के गुप्ता जी के चहरे पर एक मुस्कान सी आ जाती है | दरअसल बात ये है की मानसून के आने से लोगो को मलेरिया और बुखार व् जापानी बुखार हो जाता है जिससे मेरे मुहाले के डॉक्टर गुप्ता की दुकान तेजी से चलने लगती है | आप सोच रहे होंगे की मै येसा क्यों कह रहा हु तो मै आप को बात दू की डॉक्टर गुप्ता केवल नाम के डोक्टर है उनके पास डिग्री के नाम पर 4 साल का अस्पताल में किया गया अनुभो है | खैर इस बात को छोडिये मै एक मजेदार बात बताने जा रहा हु उनके पास हर मरज के लिए बस एक ही दावा है जिसपर कोई नाम नहीं लिखा होता है लेकिन दवाए रंग बिरंगी होती है जादा दिमाग लगायंगे तो आप केवल यही बता पायंगे के उनकी दवा मे हलकी गुलाबी रंग की जो दावा है वह डॉयजिन है | उनकी पास सभी रोगों का इलाज है वह भी केवल 25 से 30 रुपये में उनकी दुकान चलने की एक वजह ये भी हो सकती है |
Wednesday, July 20, 2011
चल पड़ी डॉक्टर गुप्ता की दुकान
dhanyawad police man
log kahte hai ki jaise jaise shahar ki surat badal rahi hai hamari takdir bhi badal rahi hai | yakin nahi ata to apne sahar ko hi le lijiye | aaj se jada nhi 5 sal pahle sahar me kitana badlao aya hai patli sakari road aaj logo ka gar gira kar kitan chaudha ho gaya hai jispe aap apne baik ya car ko bedhadak teji se chala sakte hai, ha bhai maanta hu isse ek ya do durghatana ho jati hai lekin durghatana to durghatana hi hoti hai uskhe liye sarkar ke bnaye gaye road pr jispe sarkar karodho rupaye kharch kar ke aap ke liye road banati hai aap bailgadhi ki trah car chalayeange to kya ye sarkar ki mehant ka aap man nhi hoga ye bhala achha lagega . aaj sham ki baat hi lelijiye baik se ek ladake se thokar lagne se pair toot gaya is chhoti si baat par kuchh logo ne hangama kar diya sukar ho police man ka ki usane logo ko sarkar ke banaye gaye road ki ahmiyat ko samjh kar baik ole ko ijat se jane diya police ole ne logo ko sahi baat batai ki road ka nirmardh gadiyo ke liye hai n ki paidl chalne walo ke liye |mai shukra gujar hu polic wale ka jisane logo ko sahi jankari di | मन की बात
महिलाओ को आत्म निर्भर बनाने के लिए सरकार नए -नए शिक्षण संस्थान खोल रहा है , जिसमे महिलाओ को सिलाई , कढाई , के अलावा ब्यूटी पार्लर की भी ट्रेनिंग दी जाती है | ये ऐसा इस लिए किया जाता है की महिलाये आज के दौर में किसे के ऊपर आश्रित न रह सके , लेकिन इस प्रशिक्षण के आड़ में बहुत से लोग अपना उल्लू सीधा कर रहे है | पिछले साल की बात है इलाहाबाद में एक योजना चली थी जिसमे 10 महिलाओ को बिना पैसे दिए सिलाई और ब्यूटी पार्लर का काम सिखाना था इस काम के लिए मोहल्ले की ही दो औरतो को योजना के मेम्बर ने चुना था | योजना के सदस्यों ने दोनों महिलाओ से कहा था की उन्हें सरकार की तरफ से सारे सामान दिए जायंगे आप को केवल 10 महिलाओ को 6 महीने तक ये काम सीखाना है इसके लिए आप को २०००रु. भी दिए जाएंगे | 10 महिलाओ को आप को 20 रूपए का फॉर्म भरवाना होगा दोनों औरतो ने सब काम कर लिए और 10 महिलाओ को जीजान से कम भी सीखाने लगी लेकिन जब 3 महीने तक पैसे नहीं मिले तो एक औरत ने कम सीखाना छोड़ दिया जब की दूसरी औरत का कहना है की इन गरीब महिलाओ को सीखने के लिए पैसे नहीं चाहिए मै उन्हें खाली समय में सीखा दुँगी . इस कम के लिए मुझे तो धोखा तो मिला है लेकिन मेरे मन को जो शांति मिलाती है उसके आगे धोखा आड़े नही आता है |
Tuesday, July 5, 2011
इसके बारे में सोचिये जरुर .......................
आज सुबह राय जी अपने घर के बहार कुर्शी पर बैठ कर चाय की चुस्की के साथ अख़बार देख रहे थे , तभी उनकी नजर ज्वोगिंग करके आ रहे पांडे जी पर पड़ी | अजी आप ये सोच रहे है कौन पांडे जी कौन राय जी | तो भाई आप को बता देता हु की पांडे जी और राय जी मेरे पडोसी है | अजी आप के भी होंगे पांडे , राय न सही शुक्ल जी या शर्मा जी तो होंगे | लो भाई मै भी क्या बात लेकर बैठ गया | मै तो भूल ही गया था की पडोसी तो हर किसी के होते है |
हा तो मै क्या बताने जा रहा था | आज सुबह राय जी अपने घर के बहार कुर्शी पर बैठ कर चाय की चुस्की के साथ अख़बार देख रहे थे , तभी उनकी नजर ज्वोगिंग करके आ रहे पांडे जी पर पड़ी | लो मै फिर बताना भूल गया क्या करू आज कल मुझे भी नेतावो की तरह भूलने की जो आदत जो हो गई है | अभी कल की ही बात ले लीजिए अपने भतीजे की फीस जमा करने उसके स्कूल जाना था लेकिन ये बात मेरे दिमाग से कब उतर गई मुझे पता भी नही चला अब तो मुझे लेट फीस ५०० रूपए देने होंगे | लो फिर मै जो बात बताने जा रहा था उसे तो मै भूल ही गया | हा तो मै कह रहा था की आज सुबह राय जी अपने घर के बहार कुर्शी पर बैठ कर चाय की चुस्की के साथ अख़बार देख रहे थे , तभी उनकी नजर ज्वोगिंग करके आ रहे पांडे जी पर पड़ी | उन्होंने पांडे जी की तरफ देखा और जोर से आवाज लगाई | दरअसल उस समय मै आपने छत के बालकोनी से बाहर की तरफ आते जाते लोगो को देख रहा था | क्या करे घर में बैठे- बैठे बोर हो जाते है , कही आ - जा भी तो नही सकते आज कल शहर की सड़को का जो हॉल है ओ तो आप को भी पता है, लेकिन एक बात तो है | इससे मेरे मोहल्ले के बच्चे काफी खुश नजर दिख रहे थे | आप भी सोच रहे है की ख़राब सड़को से बच्चो की ख़ुशी का कैसा सम्बन्ध | अजी हुआ यु की सड़को के खुदे होने से जगह - जगह बारिश का पानी इकठ्ठा होने के कारण छोटे -छोटे तलब बन गए थे | जिससे बच्चे उनमे स्कूल जाते समय गिर जाते थे इस लिए प्रशाशन को ५ जुलाई तक स्कूल बंद करना पड़ा | लो फिर मै भूल ही गया की मै आप से क्या बाते करने जा रहा था |
हा तो मै कह रहा था की मै आपने छत के बालकोनी से बाहर की तरफ आते जाते लोगो को देख रहा था |तभी राय जी ने पांडे जी को आवाज लगाई ,
"अरे भाई पांडे जी क्या हल है |"
"बिलकुल बड़िया अपना बताइए " पांडे जी ने कहा |
राय जी - क्या बताए | फिर से सरकार ने डीजल और रसोई गैस के दम बढा दिए , न जाने क्या होगा लोगो का |
बात को बिच में ही कटते हुआ पांडे जी बोले - क्या होगा जनता का कुछ नही होगा न इस देश का और देश की जनता का | मै कहू अगर महगाई से निज़ात पाना है, तो खुद का बिजनेस करो |
राय जी - कैसा बिजनेस?
पांडे जी - मै कहू स्कूल का बिजनेस , वैसे आप के पास जमीन भी है ओ भी रोड के किनारे |
राय जी - है |
पांडे जी - तो मै कहू आप स्कूल का बिजनेस कर ही लीजिए | फायदा ही फायदा है अपने शुक्ला जी को देखिये स्कूल के पैसे से आज उनके पास चार पहिये वाली गाड़ी भी है , कल उन्होंने मुझसे बता करते हुए बताया की उन्होंने स्कूल के बगल की जमीन भी खरीद ली है |
राय जी - (कसमसाते हुए बोले ) पांडे जी कुछ अच्छा नही लग रहा है | आखिर बच्चो के भभिष्य का सवाल है और पढ़ने के लिए अच्छे टीचर की भी तो जरूरत पड़ेगी |
पांडे जी - मै कहू अपने देश में पढने और पढ़ाने वालो की कमी है क्या ?
भगवान की दया और सरकार की कृपा से अपने देश में लाखो पढ़े लिखे बेरोजगार लोग है | जो चन्द रुपये में पढ़ाने के लिए मिल जायेगे |
राय जी - लेकिन पांडे जी सवाल तो बच्चो की भभिष्य का है |
पांडे जी - अम्मा यार क्या भभिष्य - भभिष्य लगा बैठे हो | जब हमारी सरकार खुद अपने देश का भभिष्य नही सुधारना चाहती है तो आप के सूधारने से सुधरेगा | बाबा राम देव भी चले थे देश सुधारने देखा उनका है | चलो बाबा राम देव न सही अन्ना को ही ले लो कब से लोक पल बिल बना कर नेताओ के चक्कर कट रहे है अब तक पारित होने की कोई उम्मीद दिख रही है , मिल रहा है तो झूठा अस्वाशन |
राय जी - आप बाते अच्छी कर लेते है |
पांडे जी - तो क्या सोचा आप ने मै कहू आज बड़ी-बड़ी विश्वविद्यालाओ के टीचर अपना खुद का स्कूल और कॉलेज खोल रहे है | पूछिये क्यों ...........?
राय जी - क्यों?
पांडे जी - क्यों की उनको पता है है की स्कूल के बिजनेस में जो मुनाफा है वह और किसी बिजनेस में नही |
राय जी हम तो चल रहे है घर , अगर महगाई से छुटकारा पाना है है तो मै कहू स्कूल जैसा बिजनेस कोई नही है | आप की कम्पनी घटे में चली जाएगी पर स्कूल कभी नही | इसके बारे में सोचिये जरुर |
मानेन्द्र कुमार भारद्वाज
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