महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को यूपीए सरकार अब तक अपनी बड़ी उपलब्धि बता कर अपना पीठ खुद थपथपा रही थी और अब जब विधानसभा चुनाव नजदीक आ गया है तो उसे अचानक से ये याद आया है कि जिस ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को यूपीए सरकार गावं के विकाश और भूखे बेरोजगार लोगों का पेट भरने एवं रोजगार दिलाने के लिए शुरू किया है दरअसल वह कुछ सफेद कुर्ते वालो और सरकारी मुलाजिमो के पेटो की खाई को भर रहा है | ऐसे में एक बात जो दिमाग में आती है वह ये है कि क्या सही में यूपीए सरकार को अब जाकर पता चला है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने मनरेगा में गड़बड़ी किया है | या फिर विधान सभा चुनाव के ठीक पहले इस मामले को उजागर कर के अपनी स्थिति यूपी में मजबूत करने के लिए एक चुनावी पैतरा है | बात कुछ भी हो लेकिनी ये तो तैय है कि योजना में गड़बड़ी के लिए जितना ज्यादा दोषी उत्तर प्रदेश सरकार का है उतना ही दोषी यूपीए सरकार भी है | ये गड़बड़िया केवल यूपी में ही नहीं है | देश के अधिकतर राज्यों में इस तरह के मामले है | जिसपर अब तक शायद ग्रामीण विकाश मंत्री का ध्यान नहीं गया है | अगर यूपीए सरकार शुरू से ही राज्य सरकारों द्वारा किये गए खर्च का लेखा - जोखा एक बार देख लेती तो शायद आज ग्रामीण इलाको की तस्वीर कुछ बदली हुई होती |
मनरेगा मामले में जो एक बात नजर आती है वह ये है कि यूपीए सरकार और उत्तर प्रदेश की मंत्री , दोनों विधानसभा चुनाव के लिए एक दूसरे को घेरने में लगे हुए है | जिसके लिए ग्रामीण विकाश मंत्री जयराम रमेश ने मायावती के द्वारा भेजे गए पत्र का जवाब कुछ इस तरह दिया की मायावती मुश्किल में नजर आ रही है | जयराम रमेश ने मायावती को एक पत्र लिख कर मामले की जाँच के लिए कहा है | जयराम रमेश ने पत्र में लिखा है कि यदि मायावती दोषियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं करती है तो वह सीबीआई से जाँच करवाएंगे |
दरअसल कुछ महीनो पहले मायावती ने मनरेगा में सात जनपदों में पाए गए दोषी अधिकारयो के खिलाफ कार्यवाही करने की बात कही थी जो अब तक उन्होंने नहीं किया | दरअसल मोंटेक सिंह अहलूवालिया की अगुवाई वाला योजना आयोग अपनी रिपोर्ट में कहा जा चुका था कि मनरेगा के तहत सालाना दिए जा रहे 40 हजार करोड़ रुपये का ठीक से उपयोग नहीं हो रहा। जिसके बाद जिन सात जनपदों पर आरोप लगे है वह कुछ इस तरह के है |
1. बलरामपुर : वर्ष 2007-08 के दौरान कैलेंडर, टेंट, छोलदारी, पानी की टंकी, मेडिकल किट, शिकायत पेटिका, डिस्प्ले बोर्ड, कुर्सी-मेज, टिन प्लेट में धनराशि की लूट एवं कमीशन खोरी में दोषी सच्चिदानंद दुबे के खिलाफ कार्रवाई नहीं।
2. गोंडा : पिछले तीन वर्षों में मुख्य विकास अधिकारी राज बहादुर की मिलीभगत से सामान की खरीद में गंभीर अनियमितताएं। अधिकारी ने 40 लाख के खिलौनों की खरीद दिखाई।
3. महोबा : अधिकारी पर आपूर्तिकर्ता से मिलीभगत का आरोप, ऊंचे दामों पर खरीद कर जबरन पंचायतों के खाते से भुगतान किया गया। निलंबन की घोषणा हुई जो बाद में दोषमुक्त करार ।
4. कुशीनगर : योजना के धन की जिला पंचायत सदस्य विजय अग्रवाल ने की लूट, जांच में दोषी करार, परिवार वालों के खातों की जांच में दो लाख तक के नकद लेनदेन साबित
5. मिर्जापुर : योजना की राशि से कराए गए चार करोड़ रुपये के कार्यों में भारी अनियमितता, विकास खंड अधिकारी, कर्मचारी प्रमुख और बीडीसी पर आरोप साबित
६. संत कबीर नगर : योजना राशि पर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त क्षेत्र के बाहुबलियों का कब्जा, जबरन धनराशि हड़पने का मामला, सरकारी अधिकारियों की शिकायत के बाद कार्रवाई नहीं
7. सोनभद्र : जनपद में योजना के तहत कार्य नहीं, ग्राम पंचायत सचिव राजेश दुबे की पत्नी के खाते में करोड़ों की राशि, जांच के बाद दोषी पाए गए, कार्रवाई नहीं हुई |
एक बात तो तैय है कि दोनों एक दूसरे की कमियों को जनता के सामने रख कर अपना उल्लू सीधा करने के चक्कर में लगे हुए है | लेकिन जनता उनके इन झासे में आने वाली नहीं है | देश की जनता अब एक ऐसी सरकार को चाहती है जो केंद्र और राज्य स्तर दोनों के लिए साफ सुथरी छवि का हो | मौजूदा दौर में अन्ना के भ्रष्टाचार आन्दोलन में लोगों के जुड़ने का मुख्य कारण यही था कि देश की जनता आज तक देश में हुए भ्रष्टाचार से तंग आ गई है और वह भ्रष्टाचार से छुटकारा पाना चाहती है |
मानेद्र कुमार भारद्वाज
इंडिया हल्ला बोल