कभी खामोश बैठोगे , कभी कुछ गुनगुनाओगे मै उतना याद आउंगा , मुझे जितना भूलाओगे , जी हां ऐसे ही सैकड़ो गजलो को अपनी आवाज दे करोडो लोगो को गजलो का दीवाना बनाने वाले जगजीत सिंह जिंदगी की धुप से निकल कर ईस्वर के चरणों में शरण ले ली है |
जगजीत जी का जाना एक ऐसी क्षति है , जिसे कोई पूरा नहीं कर सकता है | उन्हो ने गजल को सीमित दायरे से निकाल कर आम आदमी तक पहुचाया | जगजीत सिंह की आसान उर्दू भाषा वाली गजलो को लोगो ने खूब पसंद किया | जो आज युवा पीढ़ी को काफी पसंद है | जहा कभी गजल में तबला और सारंगी का प्रयोग होता था , वही जगजीत सिंह ने आधुनिक साज का प्रयोग किया | 20 सितम्बर को उस हसीन शाम के गवाह बने गजल प्रेमियों को शायद यह पता नहीं था कि जगजीत सिंह दोबारा कभी मंच पर नहीं लौटेंगे | 20 सितम्बर की शाम द इण्डिया पब्लिक स्कूल राजावाला के स्थापना दिवस समारोह में जगजीत जी शामिल हुए थे | जिसके बाद जगजीत जी की तबियत ख़राब होने से लीलावती अस्पताल में भर्ती होकर अपबा इलाज करवा रहे थे , जिनका इलाज करवाते समय उनका देहांत हो गया | उनके इस देहान्त के बाद मानो सारा देश गम में डूब गया | उनके इस देहान्त पर देश के प्रधानमंत्री , लता , अमिताभ बच्चन और देश के जाने माने हस्तियों ने खेद व्यक्त किया |
जगजीत सिंग का संस्कार मंगलवार को मुंबई के मरीन लाइंस के चंदनवाड़ी में मौजूद विद्युत शवदाह गृह में संपन्न तो हो गया , लेकिन उनकी एक खास चीज जो हमेसा हम लोगो को उनकी याद दिलाएगी वह है , उनकी गजले |
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