हाल ही में जारी गरीबी के आकंड़ो को लेकर केंद्र सरकार जो लोगो की आलोचनाये झेल रही थी उससे निजात पाने के लिए योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने स्पष्ट किया है कि शहरी इलाकों में 32 रुपए और ग्रामीण इलाकों में 26 रुपए प्रति व्यक्ति प्रतिदिन आय को गरीबी रेखा का आधार नहीं बनाया जाएगा। मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने ऐलान किया है कि सामाजिक-आर्थिक आधार पर देश में फिर से सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके तहत ग्रामीण इलाकों में गरीबों की गिनती होगी। आहलूवालिया के मुताबिक इसी सर्वे के आधार पर कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। वहीं, आहलूवालिया के साथ ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि यह सर्वे जनवरी, 2012 तक पूरी कर लिया जाएगा। रमेश के मुताबिक जातिगत जनगणना के साथ ही इस सर्वे का काम ग्रामीण विकास मंत्रालय कराएगा। ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने सोमवार को योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया के स्वदेश लौटने के बाद गरीबी रेखा की परिभाषा के बारे में एक घंटे तक इस मुद्दे पर बातचीत की |हम आप को बता दे की योजना आयोग ने अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट को बताया था की सरकारी नजरो में देश का शहरी नागरिक गरीब नहीं मानाजायेगा , अगर वह 965 रुपये मासिक खर्च करने की क्षमता रखते हो | देहाती नागरिक गरीब नहीं माने जायेंगे अगर वह 781 रुपये हर माह खर्च कर सकते हो |
रमेश ने उच्चतम न्यायालय में योजना आयोग के हलफनामे का विरोध किया था जिसमें तेंदुलकर फॉर्मूले के आधार पर शहरी इलाकों में 32 रुपए प्रति व्यक्ति और ग्रामीण इलाकों में 26 रुपए प्रति व्यक्ति प्रतिदिन से अधिक आय वालों को गरीब नहीं माना गया। अब कौन गरीबी रेखा के अंतर्गत आयेंगे इसका फैसला जनवरी 2012 तक किये गए सर्वे के बाद पता चलेगा |
मानेन्द्र कुमार भारद्वाज
मानेन्द्र कुमार भारद्वाज
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