जैसे - जैसे चुनावी प्रक्रिया तेज हो रही है वैसे - वैसे कांग्रेश के नेताओ और अन्ना के बीच विवाद भी तेज होता जा रहा है | अभी कांग्रेश महासचिव दिग्विजय सिंह के बीच विवादों का उठा - पठख चल ही रहा था कि केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और अन्ना हजारे के बीच लोकपाल बिल के मसौदे पर बैठक के दौरान हुई बात ने एक नए विवाद को उजागर कर दिया है |जिसमे मुखर्जी ने यह धमकी अन्ना की टीम को दे डाली दी थी कि अब आप अपने रास्ते जाएंगे और सरकार अपने रास्ते चलेगी। दरसल उन्होंने यह धमकी बैठक का बहिष्कार करने की अन्ना की चेतावनी के जवाब में दी थी। वही पिछले दिनों हिसार उपचुनाव में कांग्रेस को वोट न देने की अन्ना की अपील का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने अन्ना टीम बार फिर पलटवार किया था | जहा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अन्ना को खत लिखकर कहा था कि लोकपाल बिल लाने पर सरकार प्रतिबद्ध है। चुनाव सुधारों के लिए भी सरकार कई प्रस्तावों पर विचार कर रही है, लेकिन राइट टू रिजेक्ट का प्रावधान करने के लिए सभी दलों में सहमति होना जरूरी है। हम आप को बता दे कि अन्ना चुनाव संबंधी कानून में राइट टू रिजेक्ट का प्रावधान करने की मांग कर रहे थे । वही दिग्विजय ने अन्ना से कहा था कि चाहे शांति भूषण हों या उनके बेटे प्रशांत भूषण या फिर अरविंद केजरीवाल। ये सभी लोग कांग्रेस के विरोधी रहे हैं। ये सभी अपना राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध करने में लगे हुए हैं और इस काम के लिए आपके साफ सुथरे चरित्र का दोहन कर रहे हैं।
वही आज सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत सामने आए बैठक के ऑडियो टेप से यह बात उजागर हुई है कि भ्रष्ठाचार के खिलाफ हुई बैठक में अन्ना ने कहा था कि अगर 30 जून तक लोकपाल बिल का मसौदा तैयार नहीं हुआ तो वह साझा मसौदा समिति से खुद को अलग कर लेंगे। पहले तो प्रणब ने समझाया कि ऐसे रवैये से बात नहीं बनेगी। पर बाद में उन्होंने भी कडा रुख अख्तियार कर लिया। ऑडियो टेप के द्वारा अब वह तमाम बात चीत लोगो के सामने आ रहा है | जो कांग्रेश और अन्ना के टीम के बीच हुई थी | इस ऑडियो टेप के द्वारा
चिदंबरम और शांति भूषण के बीच हुई बात चीत भी लोगो के सामने आया है | जिसमे चिदंबरम ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि आपकी बात सही हो लेकिन मुद्दा यह नहीं है, जो लोकपाल आप लोग बनाने जा रहे हैं क्या वह वाकई में सरकारी मशीनरी में भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता जैसे मुद्दों पर नजर रख पाएगा। चिदंबरम ने कहा कि सरकार जिस लोकपाल की बात कर रही है वह अर्ध-न्यायिक होगा जो उच्च स्तर पर फैले भ्रष्टाचार के मामले देखेगा। चिदंबरम ने कहा कि उच्च स्तर की परिभाषा क्या होगी, यह बैठकर हम तय कर सकते हैं। इस पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इस मुद्दे पर हमारे बीच ज्यादा मतभेद नहीं है। देश में लगभग 40 लाख सरकारी कर्मचारी हैं। 8 लाख कर्मचारी तो अर्ध सैनिक बलों से ही हैं ऐसे में हमें भ्रष्टाचार की शिकायत को देखने के लिए सैकड़ों अधिकारियों की जरूरत होगी । टीम अन्ना और मंत्रियो के बीच हुई ऐसी तमाम बाते अब लोगो को इस ऑडियो टेप के द्वारा सामने आ रहा है | जिससे कांग्रेश और अन्ना टीम के बीच तकरार बढती नजर आ रही है |
मानेन्द्र कुमार भारद्वाज
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