खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ( एफडीआई ) बढ़ाने के फैसले को लेकर सरकार के खिलाफ अभी तक बवाल थमा भी नहीं था कि सामाजिक कार्यकर्त्ता अन्ना हजारे ने भी एफडीआई के खिलाफ बोलते हुए सरकार से एफडीआई के मुद्दे पर फिर से सोचने को कहा है | अन्ना ने कहा कि सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि अंग्रेज भी इस देश में तराजू लेकर आए थे। लेकिन हमें गुलाम बना लिया। हम पर राज किया। आज फिर हम उन्हें अपने देश में व्यापार करने बुला रहे हैं। वो पानी हमारा बर्बाद करेंगे, बिजली बर्बाद करेंगे और वातावरण को बर्बाद करेंगे और हम उन्हें बुला रहे हैं। सरकार को किसी पक्ष की भलाई नहीं बल्कि देश की भलाई सोचनी चाहिए। यदि आप किसानों की भलाई सोच रहे होते तो किसानों की आत्महत्या रुक गई होती।
दरअसल सरकार का कहना है कि इस फैसले से महंगाई में कमी आयेगी | सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से विचौलियों की भूमिका ख़त्म होगी और आम लोगों को सस्ते में सामान मिलेंगे | वही देश के अधिकांश राज्यों के व्यापारियों ने इसका विरोध किया है | उनका मानना है कि अगर विदेशी निवेश भारत में हुआ तो उनके व्यापार पर ज्यादा असर पड़ेगा | वही बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एफडीआई के मुद्दे पर सरकार का विरोध करत हुए कहा कि इस मामले में सरकार देश को धोखा दे रही है और गलत रिपोर्टों का उल्लेख कर रही है।
वही एफडीआई के मुद्दे पर संसद में आज भी हंगामा हुआ जिसके चलते संसद में कोई भी काम नहीं हो सका | जिसके चलते करीब एक हफ्ते से ससंद की कार्यवाही न चलने के कारण रोजाना २ करोड़ रूपये का नुकसान होता है |
इंडिया हल्ला बोल
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