भ्रष्टाचार का विरोध कर रहे गाधीवादी अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि यदि 22 नवम्बर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में प्रभावी लोकपाल विधेयक पारित नहीं हुआ तो वह अपना अनशन फिर से शुरू कर देंगे।अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में लिखा है कि उन्होंने 16 अगस्त को रामलीला मैदान में शुरू हुए अनशन को प्रधानमंत्री से लिखित आश्वासन मिलने के बाद खत्म किया था। यह पत्र केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख ने उन्हें सौंपा था।
हजारे ने कहा कि केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख जी ने रामलीला मैदान में आकर लिखित आश्वासन दिया था कि आने वाले शीतकालीन सत्र में हमारी सरकार भ्रष्टाचार को रोकने के लिए जनलोकपाल विधेयक एक कठोर कानून बनवाएगी तब तक आप हमें समय दें।जिसके लिए हमने अनशन ख़त्म कर दिया और मैंने आने वाले पाच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान दौरा करने की योजना को रद्द कर दिया था। अन्ना हजारे ने कहा कि अभी भी मैं विश्वास कर रहा हूं कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान एक कठोर जन लोकपाल आने वाला है।
हजारे ने कहा कि भ्रष्टाचार की वजह से आम आदमी का जीना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के कारण महंगाई बढ़ने से सामान्य लोगों को परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। देश में विकासकार्यो में खर्च किए जाने वाले एक रुपये में से वास्तव में केवल 10 पैसा ही विकास पर खर्च किया जाता है। हजारे ने अपने पत्र में कहा कि यदि एक प्रभावी जन लोकपाल विधेयक आएगा तो यह देश को भ्रष्टाचार से निपटने में मदद करेगा और इससे विकास कार्यो के लिए ज्यादा धन उपलब्ध हो सकेगा।
अन्ना ने अपने पत्र में कहा है कि सरकार के सदस्य आश्वासन के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं और भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। उनकी टीम चुनावी राज्यों का दौरा करेगी और इस दौरान किसी का नाम न लेते हुए साफ सुथरे छवि वाले उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने का आह्वान करेगी।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में आगामी होने वाले विधान सभा चुनाव के पहले अन्ना हजारे का संसद के शीतकालीन सत्र में प्रभावी लोकपाल विधेयक पारित करने कि मांग कांग्रेस के लिए एक नई मुश्किल पैदा कर सकती है |
मानेद्र कुमार भारद्वाज
इंडिया हल्ला बोल
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