जैसे - जैसे विधान सभा चुनाव करीब आ रहा है, वैसे - वैसे नेताओ के दौरे और लुभावने वादे भी तेज होते जा रहे है | हर नेता अपने तरीके से जनता को अपने पाले में लाने की दाव पेच आजमाने शुरू कर दिए है | कोई रथ यात्रा पर है, तो कोई चुपके से किसी के भी बीच में पहुच जाता है | तो कोई चार से पाँच साल बाद जनता पर इतनी मेहरबान हो जाता है कि सरकारी नौकरी करने वाले कर्मचारियों के तनखाह और भत्ते बढ़ा दिए जाते है | जहा पिछले दीपावली पर सरकार कि तरफ से एक चाय नहीं मिली थी, वही आज इस दीपावली पर राज्य के मुख्य मंत्री ने तोहफे के रूप में तीन दिनों का बोनस भी दे डाला है | ये ऐसा किस लिए है , ये तो आप भी भली प्रकार से समझते है | ये सब जनता को अपने तरफ करने के चुनावी पैतरे है | जिसे हर नेता अपने अनुसार आजमा रहा है |बात अब से कुछ दिनों के पहले का ही ले लीजिये | जब राहुल गाँधी ने 1 नवम्बर को वाराणसी पहुच कर लोगो को भौचक्का कर दिया | जिसके बाद राहुल ने अपने अघोषित उत्तर प्रदेश दौरे के दूसरे दिन बुधवार को मिर्जापुर जिले के नरसिंहपुर गांव में चौपाल लगाकर ग्रामीणों से बिजली, पानी और खाद से जुड़ी समस्याएं सुनीं एवं उनसे केंद्रीय योजनाओं, खासकर महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के क्रियान्वयन की जानकारी ली। जिसपर राहुल ने उत्तर प्रदेश के सरकार की गड़बड़ी पर दोष देते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा किसानों और गरीबों के लिए शुरू की गईं हजारों करोड़ रुपये की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ के क्रियान्वयन में गड़बड़ी के कारण उन तक नहीं पहुंच पा रहा है। जाने अनजाने में राहुल ने अपनी उत्तर प्रदेश में आने कि मन्श भी जाहिर कर दी | जब उन्होंने लोगो से ये कहा कि आप को राज्य सरकार पर गुस्सा नहीं आता है | अगर विकास चाहिए तो कांग्रेस की सरकार लाइए |
जिस पर कई स्थानीय नेताओ ने राहुल को यह कह कर चुटकी लेनी शुरू कर दी कि ये अतिथि तो बड़ा अजीब है | हमारे घर आता रुखा सुखा खाता है और हमें ही बुरा बनाकर जाता है | जब खुद केंद्र सरकार इतनी भ्रष्ट है तो राज्य सरकार का हाल तो यही होगा | गुस्सा तो केंद्र सरकार पर भी आता है पर क्या केंद्र सरकार कुर्सी से उतरना चाहेगी | वही कुछ लोगो का ये कहना था कि ये तो राहुल की खटिये और पूड़ी की पुरानी राजनीति है |
दरअसल राहुल के अचानक दौरे से सब लोग भौचक्का हो जाते है, और राहुल लोगो की वाह वाई लूटने में सफल हो जाते है | लोगो को लगता है कि राहुल जैसा शुभ चिंतक कोई दूसरा है ही नहीं | आप को याद ही होगा आज से करीब तीन साल पहले राहुल ने लोकसभा में जब से कलावती की बात की तो लोगो को लगा कि राहुल वाकई में गरीबो का दुःख दर्द समझते है | राहुल ने लोकसभा में अपने भाषण में बोलते हुए कहा था कि " मै आपको नौ बच्चो की माँ कलावती के घर ले चलूंगा , जिसके पति ने खुदखुशी कर ली थी | मै आप से विनती करता हु कि आप उसका सम्मान करे |" भाषण में राहुल बता रहे थे कि किस तरह से कलावती ने कई तरह से अपनी आमदनी बढाई | तब से वह ग्रामीण पुनरुत्थान कि प्रतिक बन गई है | लोगो को कलावती को घर लेजाने वाले राहुल खुद ही उसके घर उसकी खोज खबर तक लेने नहीं गए |
राहुल के दौरे के कुछ हफ्ते के भीतर ही स्वयंसेवी संगठन सुलभ इंटरनॅशनल ने कलावती को 36 लाख रुपये दिए | इतना पैसे पाने वाली वह नागपुर विदर्भ की इकलौती विधवा थी | मगर पच्चीस हजार रुपये के मासिक ब्याज को बेटियों और दामादो में बाटने पर उसके पास बहुत कम पैसे बचता है | शर्तो के मुताबिक , वह सावधि खाते में जमा रकम तब तक नहीं निकाल सकती है जब तक उसका छोटा बेटा , जो फ़िलहाल आठ साल का है वयस्क नहीं हो जाता | अगर उसे जमा पैसा निकालने की छुट होती तो आज उसकी बेटी की जिदगी बच सकती थी | दरअसल 2010 को उसके दामाद ने कर्ज के तले आ कर आत्म हत्या कर ली थी | वही पिछले साल उसकी बेटी ने भी खुद ख़ुशी कर ली |
बात अभी अन्ना हजारे के आन्दोलन का ही ले लीजिये | जो उन्होंने संसद में अन्ना हजारे के लोकपाल बिल पर बोला उससे तो लोगो का राहुल के प्रति विश्वास ही नहीं टुटा बल्कि लोगो ने तो राहुल का मजा यह कह कर लेना शुरू कर दिया कि पप्पू फेल हो गया | ये बात केवल राहुल की ही नहीं है बल्कि और भी नेताओ की है |
उत्तर प्रदेश में तो जैसे जैसे लोक सभा चुनाव का समय नजदीक आ रहा है, माया के जादुई पिटारे से एक से बढकर एक प्रलोभन के तीर निकल रहे है | जिसके असर में उस राज्य कि जनता तो आ ही रही है | साथ ही साथ महाराष्ट्र में भी इसका असर दिखाई पड़ रहा है | माया ने जैसे ही उत्तर प्रदेश में गन्ना के मूल्यों में बढ़ोतरी की महाराष्ट्र के किसानो ने भी गन्ना के दाम में बढ़ोतरी को लेकर अनशन पर बैठ गए |
माया ने उत्तर प्रदेश में जनता को अपने पाले में करने के लिय कई घोषणा की है | प्रदेश में अपनी अगली पारी पक्की करने के गरज से मायावती ने सरकारी कर्मचारियों पर सौगातो की बरसात कर दी है | सरकारी कर्मचारी वोट के हिसाब से अहम होते ही है साथ ही साथ ये चुनाव में ड्यूटी के समय भी अहम होते है | इसलिए माया ने इनपर बोनस , बेतन , प्रमोशन के साथ भत्तो में इजाफा भी किया है | इतना ही नहीं मायावती ने इस दीवाली पर कर्मचारियों को तीन दिनों का बोनस भी दे डाला है |
अगर बात भजपा कि की जाय तो उसने चुनाव में इस बार अन्ना फैक्टर को अपना हथियार बनाया है | भाजपा के नेता जहा भी जाते है भ्रष्टाचार और अन्ना का मुद्दा उठाकर लोगो को अपने खेमे में लाने का प्रयास कर रहे है | इसका तजा उदाहारण हिसार चुनाव का परिणाम है | अगर भ्रष्टाचार कि बात की जाय तो भाजप कोई दूध की धूलि हुई नहीं है | ये सबको पता है, लेकिन समय की नजाकत को देखते हुए भाजपा अपने आप को कुछ इस तरह प्रस्तुत कर रहा कि मानो वह सबसे साफ़ सुथरी पार्टी है | ऐसे में अन्ना हजारे का कांग्रेस को वोट न देने की अपील का फायदा भाजपा को ही हो रहा है |
बात कुछ भी हो लेकिन इतना तो तय ही है कि आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए सभी पार्टीयो ने जनता को लुभाने के लिए अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर ली है |
मानेन्द्र कुमार भारद्वाज
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