जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव करीब आ रहा है, वैसे-वैसे नेताओ के लुभावने वादे भी तेज होते जा रहे है | 2007 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए इस बार मायावती ने ब्राहमणों को एक बार फिर मैदान में उतराने की सोची है | प्रदेश में ब्राह्मण 12 प्रतिशत से अधिक है।
जहा पिछले कुछ दिनों में मायावती ने प्रदेश में अपनी अगली पारी पक्की करने के लिए सरकारी कर्मचारियों पर बोनस , बेतन , प्रमोशन के साथ भत्तो में इजाफा भी किया और उत्तर प्रदेश में गन्ना के मूल्यों में बढ़ोतरी की | वही रविवार को बसपा ब्राह्मण समाज भाईचारा प्रदेश-स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में मायावती ने कहा कि 2012 में सरकार बनने पर ब्राह्मण वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व दिया जायेगा। बसपा के अलावा कोई भी पार्टी ब्राह्मणों को महत्व देने वाली नही है। यह इशारा करते हुए उन्होने कहा कि उनकी पक्की जानकारी है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर राजनाथ सिंह और कांग्रेस की सरकार बनने पर दिग्विजय सिंह को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा।
मायावती ने कहा कि वह समतामूलक समाज की स्थापना करना चाहती हैं। इसके लिए समाज में पिछड़ गये वर्ग दलित को थोड़ी अधिक प्राथमिकता देना उन्हीं की ही नहीं बल्कि किसी भी सरकार की मजबूरी हो सकती है। मायावती ने आरक्षण की बात कहते हुए कहा कि ऊंची जाति के गरीबों को आरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने कभी जातिवाद को बढ़ावा नहीं दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को हमारे विरोधियों के बहकावे में नहीं आना चाहिए। मायावती अपनी ही पार्टी के नेता सतीश चंद्र मिश्रा की मां के नाम पर डॉ. शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी की स्थापना के दौरान उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज में सदियों से उपेक्षित रहे दलित वर्ग की एक बेटी के नेतृत्व में चल रही बसपा सरकार के दौरान स्थापित विश्वविद्यालय का नाम एक सवर्ण जाति की महिला के नाम से रखे जाने पर, सर्वसमाज में भाईचारा पैदा करने व समतामूलक समाज व्यवस्था के निर्माण में भी कुछ हद तक गति जरूर मिलेगी। जाहिर सी बात है | बसपा ब्राह्मण कार्ड के जरीये ब्राह्मणों को वोट के लिए अपने पाले में लाने की कोशिश में लगी हुई है |
अगर 2007 के चुनाव पर नजर डाले तो पता चलता है कि 2007 के चुनाव में बसपा ने 88 ब्राह्मणों को विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया था | जिसमें से 42 जीते थे। प्रदेश की 78 सुक्षित सीटों में से 61 पर बसपा की जीत के पीछे भी ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका अहम थी |
मानेन्द्र कुमार भारद्वाज
जहा पिछले कुछ दिनों में मायावती ने प्रदेश में अपनी अगली पारी पक्की करने के लिए सरकारी कर्मचारियों पर बोनस , बेतन , प्रमोशन के साथ भत्तो में इजाफा भी किया और उत्तर प्रदेश में गन्ना के मूल्यों में बढ़ोतरी की | वही रविवार को बसपा ब्राह्मण समाज भाईचारा प्रदेश-स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में मायावती ने कहा कि 2012 में सरकार बनने पर ब्राह्मण वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व दिया जायेगा। बसपा के अलावा कोई भी पार्टी ब्राह्मणों को महत्व देने वाली नही है। यह इशारा करते हुए उन्होने कहा कि उनकी पक्की जानकारी है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर राजनाथ सिंह और कांग्रेस की सरकार बनने पर दिग्विजय सिंह को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा।
मायावती ने कहा कि वह समतामूलक समाज की स्थापना करना चाहती हैं। इसके लिए समाज में पिछड़ गये वर्ग दलित को थोड़ी अधिक प्राथमिकता देना उन्हीं की ही नहीं बल्कि किसी भी सरकार की मजबूरी हो सकती है। मायावती ने आरक्षण की बात कहते हुए कहा कि ऊंची जाति के गरीबों को आरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने कभी जातिवाद को बढ़ावा नहीं दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को हमारे विरोधियों के बहकावे में नहीं आना चाहिए। मायावती अपनी ही पार्टी के नेता सतीश चंद्र मिश्रा की मां के नाम पर डॉ. शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी की स्थापना के दौरान उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज में सदियों से उपेक्षित रहे दलित वर्ग की एक बेटी के नेतृत्व में चल रही बसपा सरकार के दौरान स्थापित विश्वविद्यालय का नाम एक सवर्ण जाति की महिला के नाम से रखे जाने पर, सर्वसमाज में भाईचारा पैदा करने व समतामूलक समाज व्यवस्था के निर्माण में भी कुछ हद तक गति जरूर मिलेगी। जाहिर सी बात है | बसपा ब्राह्मण कार्ड के जरीये ब्राह्मणों को वोट के लिए अपने पाले में लाने की कोशिश में लगी हुई है |
अगर 2007 के चुनाव पर नजर डाले तो पता चलता है कि 2007 के चुनाव में बसपा ने 88 ब्राह्मणों को विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया था | जिसमें से 42 जीते थे। प्रदेश की 78 सुक्षित सीटों में से 61 पर बसपा की जीत के पीछे भी ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका अहम थी |
मानेन्द्र कुमार भारद्वाज

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