Tuesday, July 5, 2011

इसके बारे में सोचिये जरुर .......................

आज सुबह राय जी अपने घर  के बहार कुर्शी पर बैठ कर चाय की चुस्की के साथ अख़बार देख रहे थे , तभी उनकी नजर ज्वोगिंग करके आ रहे पांडे जी पर पड़ी | अजी आप ये सोच रहे है कौन पांडे जी कौन राय जी | तो भाई  आप को बता देता हु की पांडे जी और राय जी मेरे पडोसी है | अजी आप के भी होंगे पांडे , राय न सही शुक्ल जी या शर्मा जी तो होंगे | लो भाई मै भी क्या बात लेकर बैठ गया | मै तो भूल ही गया था की पडोसी तो हर किसी के होते है | 
                हा तो मै क्या बताने जा रहा था | आज सुबह राय जी अपने घर के बहार कुर्शी पर बैठ कर चाय की चुस्की के साथ अख़बार देख रहे थे , तभी उनकी नजर ज्वोगिंग करके आ रहे पांडे जी पर पड़ी | लो मै फिर बताना भूल गया क्या करू आज कल मुझे भी नेतावो की तरह भूलने की जो आदत जो  हो गई है | अभी कल की ही बात ले लीजिए अपने भतीजे की फीस जमा करने उसके स्कूल जाना था लेकिन ये बात  मेरे दिमाग से कब उतर गई मुझे पता भी नही चला अब तो मुझे लेट फीस ५०० रूपए देने होंगे  | लो फिर मै जो बात बताने जा रहा था उसे तो मै भूल ही गया |
              हा तो मै कह रहा था की आज सुबह राय जी अपने घर के बहार कुर्शी पर बैठ कर चाय की चुस्की के साथ अख़बार देख रहे थे , तभी उनकी नजर ज्वोगिंग करके आ रहे पांडे जी पर पड़ी | उन्होंने पांडे जी की तरफ देखा और जोर से आवाज लगाई | दरअसल उस समय मै आपने छत के बालकोनी  से बाहर की तरफ  आते जाते लोगो को देख रहा था | क्या करे घर में बैठे- बैठे बोर  हो जाते है , कही आ - जा भी तो नही सकते आज कल शहर की सड़को का जो हॉल है ओ तो आप  को भी  पता है, लेकिन एक बात तो है | इससे मेरे मोहल्ले  के बच्चे काफी  खुश नजर दिख रहे थे | आप भी सोच रहे है की ख़राब सड़को से बच्चो की ख़ुशी का कैसा सम्बन्ध | अजी हुआ यु की सड़को के  खुदे होने से जगह - जगह बारिश का पानी इकठ्ठा  होने के कारण छोटे -छोटे तलब बन गए थे | जिससे बच्चे उनमे स्कूल जाते समय  गिर जाते थे इस लिए प्रशाशन को ५ जुलाई तक स्कूल बंद करना पड़ा | लो फिर मै भूल ही गया की मै आप  से क्या बाते करने जा रहा था |
                 हा तो मै कह रहा था की मै आपने छत के बालकोनी  से बाहर की तरफ  आते जाते लोगो को देख रहा था |तभी राय जी ने पांडे जी को आवाज लगाई ,
"अरे भाई पांडे जी क्या हल है |"
"बिलकुल बड़िया अपना बताइए " पांडे जी ने कहा |
राय जी - क्या बताए | फिर से सरकार ने डीजल और रसोई गैस के दम बढा  दिए , न जाने क्या होगा लोगो का |
बात को बिच में ही कटते हुआ पांडे जी बोले - क्या होगा जनता का कुछ  नही होगा न इस देश का और देश की जनता का | मै कहू अगर महगाई से निज़ात पाना है, तो खुद का बिजनेस करो  |
राय जी - कैसा बिजनेस?
पांडे जी -  मै कहू स्कूल का बिजनेस , वैसे आप के पास जमीन भी है ओ  भी रोड के किनारे |
राय जी - है |
पांडे जी - तो मै कहू आप स्कूल का बिजनेस कर ही लीजिए | फायदा ही फायदा है अपने शुक्ला  जी को देखिये  स्कूल के पैसे से आज उनके पास चार पहिये  वाली गाड़ी भी है , कल उन्होंने  मुझसे बता  करते हुए बताया की उन्होंने स्कूल के बगल की जमीन भी खरीद ली है | 
राय जी - (कसमसाते हुए बोले )  पांडे जी कुछ अच्छा नही लग रहा है | आखिर बच्चो के भभिष्य का सवाल है और पढ़ने के लिए अच्छे टीचर  की भी तो  जरूरत  पड़ेगी |

पांडे जी - मै कहू अपने देश में पढने और पढ़ाने वालो की कमी है क्या ?
 भगवान की दया और सरकार की कृपा से अपने देश में लाखो पढ़े लिखे बेरोजगार लोग है | जो चन्द  रुपये में पढ़ाने के लिए मिल जायेगे |
राय जी - लेकिन पांडे जी सवाल तो बच्चो की भभिष्य का है |
पांडे जी - अम्मा यार क्या  भभिष्य - भभिष्य लगा बैठे  हो | जब हमारी सरकार खुद अपने देश का भभिष्य नही सुधारना चाहती है तो आप के सूधारने से सुधरेगा | बाबा राम देव भी चले  थे देश सुधारने  देखा उनका है | चलो बाबा राम देव न सही अन्ना को ही  ले लो कब से लोक पल बिल बना कर नेताओ के चक्कर कट रहे है अब तक पारित होने की कोई उम्मीद दिख रही है , मिल रहा है तो झूठा अस्वाशन |
राय जी - आप बाते अच्छी कर लेते है |
पांडे जी - तो क्या सोचा आप ने मै कहू आज बड़ी-बड़ी विश्वविद्यालाओ   के  टीचर अपना खुद का स्कूल और कॉलेज खोल रहे है | पूछिये क्यों ...........?
राय जी -  क्यों?
पांडे जी - क्यों की उनको पता है है की स्कूल के बिजनेस  में जो मुनाफा है वह और किसी बिजनेस में नही | 
राय जी हम तो चल रहे है घर , अगर महगाई से छुटकारा पाना है है तो मै कहू स्कूल जैसा  बिजनेस कोई नही है | आप की कम्पनी घटे में चली जाएगी पर स्कूल कभी नही | इसके बारे में सोचिये  जरुर |
                                                        
                                                                                  मानेन्द्र कुमार भारद्वाज 







1 comment:

  1. स्कूल मंदिर की तरह है पर आज के दौर में इसे भी पैसा कमाने का जरिया बना लिया गया है वाकिए में बहुत दयनीय स्थीती आ गयी है इश देश की ...

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