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| गुजरात दंगे में मरे बच्चे | |
यह एक घटना है जिससे मै रूबरू हुआ | लेकिन मेरे दिमाग में यह बात आती है की क्या यह तमाम माताओ के साथ ऐसा नही हुआ होगा? क्या तमाम बच्चे एस बात से नही डर गये होंगे की आज दुनिया तबाह हो जाएगी? अगर ऐसा हुआ होगा तो उसकी वजह कौन है | बेशक , बेहिचक आप और मै कहेंगे, मीडिया | जनता में इस कदर आतंक फैलाना कौन सा 'वाद' कह लायेगा, यह मै नही जानता, लेकिन आज का मीडिया इसी आतंकी व्यापार की बुनियाद पर खड़ा हुआ है | इस तरह की खबरे अक्सर किसी न किसी चैनल पर सुनने को मिल जाती है | दरासल दुनिया के ज्यादा तर व्यापार इसी बिना पर चलते है | जिस तबके से आप लाभ कमाना चाहते है उसमे दहशत भर दीजिए की वह खतरे में है | गुजरात कांड हो या फिर २६\११ का मुंबई पर आतंकी हमला मीडिया ने जिस तरह से कवरेज कर के लोगो को दिखाया था उसने देश में शांति के माहौल को और भी खराब कर दिया था |
आज मीडिया का प्रयोग एक धंधे के रूप में हो रहा है , जिससे ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाए जा सके | जब मीडिया ये कहती है की दुनिया ध्वस्त हो रही है तो लोग सहम कर चैनलों के आगे नतमस्तक हो जाते है भारत जैसे देश में आज भी यह धारणा बनी हुई है की जो छपा ओह ब्रह्म वाक्य और जो दिख रहा है उसके लिए प्रमाण की क्या जरूरत | मीडिया इसी बात का फायदा उठा रही है और ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में कोई कसर नहीं छोड़ रही है | मीडिया यह नही सोचती की किस खबर का जनमानस पर क्या प्रभाव पड़ेगा | वे तो केवल इतना सोचती है की किस खबर को किस तरह दिखाए की ज्यादा से ज्यादा फायदा हो सके | वे खबर की सच्चाई जाने बगैर छाप देते है |
इसका एक ताजा उदाहरण अभी हाल में अरुणिमा सिन्हा के साथ घटी घटना है | जिसमे उसने ट्रेन से कूद कर खुद ख़ुशी करनी चाही थी, लेकिन मीडिया वालो ने इस खबर की सच्चाई जाने बगैर ही इतना उछाला की देश के प्रधान मंत्री को हस्तक्षेप करना पड़ा | जाच के बाद जब सच्चाई सामने आई तो मीडिया में रोजाना छपने वाली खबर मीडिया से इस तरह से गायब हो गई जैसे गधे के सीर से सिंग वर्तमान समय में कुछ ऐसी प्रवृतिय उभरी है , जिसने सही और गलत के बीच की रेखा ही मिट गयी है | आज मीडिया कर्मियों का एक ही उदेश्य रहित कर्म हो गया है, वह है व्यावसायिक सफलता | किसी झूठी और निराधार खबर की सच्चाई जाने बगैर लोगो के सामने पेश कर दिया जाता है | पत्रकारिता के सारे मापदंड मानो मीडिया भूल गई है | उसके लिए तो केवल एक ही मापदंड है ज्यादा से ज्यादा मुनाफा | वह हर खबर को एक मसाला प्रोग्राम बनाकर प्रस्तुत करता है | चाहे दिल्ली में हुआ बम ब्लास्ट हो या शाहिद-प्रियंका , सैफ-करीना का प्रेम प्रसंग आदि में कोई फर्क नही | उसके लिए तो केवल हर घटना एक घटना होती है | जिसे ज्यादा से यदा नाटकीय तरीके से प्रस्तुत कर के मुनाफा कमाया जा सके | उसके लिए तो टीरपी ही सुब कुछ है |
इसका एक ताजा उदाहरण अभी हाल में अरुणिमा सिन्हा के साथ घटी घटना है | जिसमे उसने ट्रेन से कूद कर खुद ख़ुशी करनी चाही थी, लेकिन मीडिया वालो ने इस खबर की सच्चाई जाने बगैर ही इतना उछाला की देश के प्रधान मंत्री को हस्तक्षेप करना पड़ा | जाच के बाद जब सच्चाई सामने आई तो मीडिया में रोजाना छपने वाली खबर मीडिया से इस तरह से गायब हो गई जैसे गधे के सीर से सिंग वर्तमान समय में कुछ ऐसी प्रवृतिय उभरी है , जिसने सही और गलत के बीच की रेखा ही मिट गयी है | आज मीडिया कर्मियों का एक ही उदेश्य रहित कर्म हो गया है, वह है व्यावसायिक सफलता | किसी झूठी और निराधार खबर की सच्चाई जाने बगैर लोगो के सामने पेश कर दिया जाता है | पत्रकारिता के सारे मापदंड मानो मीडिया भूल गई है | उसके लिए तो केवल एक ही मापदंड है ज्यादा से ज्यादा मुनाफा | वह हर खबर को एक मसाला प्रोग्राम बनाकर प्रस्तुत करता है | चाहे दिल्ली में हुआ बम ब्लास्ट हो या शाहिद-प्रियंका , सैफ-करीना का प्रेम प्रसंग आदि में कोई फर्क नही | उसके लिए तो केवल हर घटना एक घटना होती है | जिसे ज्यादा से यदा नाटकीय तरीके से प्रस्तुत कर के मुनाफा कमाया जा सके | उसके लिए तो टीरपी ही सुब कुछ है |
इन सब बातो को ध्यान में रखते हुए यह बात मन में आती है की कही मीडिया मुनाफे और टीरपी के दौड़ में वर्षो पहले जो सच्चाई , वफादारी का विस्वास लोगो के मन में बनाया था , कही इस टीरपी और मुनाफे की आंधी में न उड़ जाये |
मानेन्द्र भारद्वाज

aap k is baat s mai sahmat hu ki kisi bhi baat k phle tay tak jana chahiye fir logo kom uski jankari deni chahye nahi to galatfami kisi ko bhi ho sakti hai jises kisi ka bhi nuksaan ho sakta hai
ReplyDeleteअपने सही कहा आपकी बात से मै सहमत हूँ
ReplyDeleteइस दौर में तो सिर्फ मुनाफा ही देखा जाता है सच्चाई चाहे जो भी हो उनको बस अपने टी. आर. पी. से ही मतलब है